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केंद्रीय बजट: पूर्वोत्तर के लिए स्ट्रेटिजिक रेल कॉरिडोर का विस्तार और सुरक्षा में वृद्धि

गुवाहाटी, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। संवेदनशील चिकन नेक क्षेत्र में रेलवे डबल लाइन का स्ट्रेटिजिक रेल कॉरिडोर बनाएगा। इसके बनने से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रेल कनेक्टिविटी सुरक्षित, आरामदायक और रफ्तार में तेजी आएगी। ये बातें केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से पूर्वी भारत के राज्य असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं ओड़िशा के लिए केंद्रीय बजट में रेल विकास पर प्रकाश डालते हुए कही।

स्ट्रेटिजिक रेल कॉरिडोर पर विस्तार से बताते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने गुवाहाटी के मालीगांव स्थित पूसीरे मुख्यालय में मीडिया कर्मियों से बातचीत में बताया कि कुल चार लेन के रेलवे ट्रैक का निर्माण करने की योजना है, जिससे वर्तमान के ट्रैक मिलाकर कुल छह लेन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर दो नए पुल बनाए जाएंगे, जिनमें एक का काम आरंभ हो गया है।

रेल मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व खर्च की घोषणा की गई है। 2009 और 2014 के बीच, औसत वार्षिक रेलवे बजट आवंटन सिर्फ 2,122 करोड़ था, जबकि 2026-27 में यह तेजी से बढ़कर 11,486 करोड़ हो गया है, जो पहले से लगभग 5 गुना अधिक है।

उन्होंने बताया कि भारत में कुल 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर शुरू किए जाएंगे, जिसमें दिल्ली – वाराणसी – सिलीगुड़ी का कॉरिडोर शामिल है। यह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में तेज और अधिक कुशल परिवहन का एक गेम चेंजर साबित होगा। आने वाले समय में इस कॉरिडोर को सिलिगुड़ी से गुवाहाटी तक विस्तार दिया जाएगा।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत, 2014 से पूर्वोत्तर में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण के लिए लगातार प्रयास करने का संकल्प लिया है।

उन्होंने जानकारी दी कि असम में देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवा की शुरुआत हुई है, जो कामाख्याहावड़ा रूट पर 17 जनवरी को शुरू की गई है। इसी प्रकार की अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेवाएं भी गुवाहाटी और अन्य शहरों को जोड़ रही हैं।

रेल मंत्री ने बताया कि 2014 से, असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में कुल 1,874 किमी नई पटरियां बिछाई गई हैं। पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में विद्युतीकरण में भी तेजी से प्रगति हुई है, जहाँ 96% से अधिक ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत, असम और पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है।

2014 से, इस क्षेत्र में 360 से अधिक रेल फ्लाईओवर और अंडर-ब्रिज का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही, दिव्यांगजनों के अनुकूल सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

बैराबी सैरंग रेल लाइन, जो मिजोरम की राजधानी को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ती है, एक प्रमुख उपलब्धि है। इसके अलावा, मणिपुर में जिरीबाम- इंफाल रेल लाइन और नगालैंड में दीमापुर- कोहिमा रेल लाइन जैसी कई अन्य परियोजनाएं भी चल रही हैं, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नया रूप दे रही हैं।

भूटान कनेक्टिविटी के लिए भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

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