
नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक के दफ्तर में हुई रेड के मामले में उच्चतम न्यायालय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका को खारिज करने की मांग की है। राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए हलफनामे में कहा गया है कि जब इसी विषय पर याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय में पहले से लंबित है, तो समानांतर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि ईडी को उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। इसे भी बताया गया कि आई-पैक के दफ्तर पर छापे से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया था। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि ईडी ने प्रिविलेज्ड कम्युनिकेशन का उल्लंघन किया है।
ज्ञात हो कि 15 जनवरी को ईडी की याचिका पर ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दखल के संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया गया था। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ईडी अधिकारियों पर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक निकाय को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की आवश्यकता है और पूरे मामले की जांच आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी को राजनीतिक दलों के चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन यदि कोई केंद्रीय जांच एजेंसी विधि के अनुसार काम कर रही है, तो उसे रोकने का कोई कारण नहीं है।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में केवियट दाखिल कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि अगर ईडी उच्चतम न्यायालय में आती है, तो बिना उनकी बात सुने कोई आदेश नहीं पारित किया जाए।
ईडी ने 8 जनवरी को तृणमूल कांग्रेस के प्रचार संभालने वाली कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था, जो कथित कोयला घोटाला मामले की जांच के सिलसिले में था। ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी छापे के दौरान वहां पहुंचीं और कुछ दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य अपने साथ ले गईं, हालांकि ममता बनर्जी ने इन आरोपों का खंडन किया है।
इस मामले में, ईडी ने उच्चतम न्यायालय में नई अर्जी पेश की है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार के निलंबन की मांग की है। ईडी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की चोरी में मदद की। अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे।
