
नई दिल्ली, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। नागरिक उड्डन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को स्पष्ट किया कि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) के तहत हवाई जहाजों के पायलटों को साप्ताहिक अवकाश देने की नीति में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। इस मामले में चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार और डीजीसीए को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान डीजीसीए की ओर से पेश वकील अंजन गोसांई ने बताया कि पायलटों को साप्ताहिक अवकाश प्रदान करने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और इसे वापस नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि केवल इंडिगो एयरलाइंस को ही रात की उड़ानों में कुछ छूट दी गई है।
उच्च न्यायालय ने पहले दिसंबर 2025 में हवाई सेवाओं में बाधा के बाद एफडीटीएल के नियम को निलंबित करने का आदेश देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसके बाद केंद्र सरकार और डीजीसीए को नोटिस जारी किया गया। कोर्ट ने गोसं से कहा कि वे अगले दिन इस मामले पर निर्देश लेकर आएं और एफडीटीएल के नियमों को लागू किए जाने के महत्व पर जोर दिया, जो यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं।
याचिका में कहा गया है कि डीजीसीए को एफडीटीएल के नियमों को लागू करने का अधिकार नहीं है, और इन्हें 2025 में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार किया गया था। याचिका में यह भी बताया गया है कि जब यह नियम लागू हुआ, तब इंडिगो ने इसे ठीक से लागू नहीं किया, जिससे दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द हो गईं, जिससे यात्रियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इसके बाद डीजीसीए ने एफडीटीएल के नियमों को फरवरी तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया, जिससे एयरलाइंस कंपनियां अपनी व्यवस्था सुधार सकें। याचिका में यह भी मांग की गई है कि एयरलाइंस कंपनियों को लो कॉस्ट के रूप में खुद को वर्गीकृत करने से रोका जाए, क्योंकि एयरक्राफ्ट एक्ट के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
