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नीति आयोग के चौथे निर्यात तैयारी सूचकांक में महाराष्ट्र शीर्ष पर

नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। नीति आयोग ने निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) 2024 जारी किया है। आयोग के चौथे निर्यात तैयारी सूचकांक में महाराष्ट्र ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस सूची में तमिलनाडु और गुजरात क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं। यह सूचकांक भारत के 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर के माल निर्यात लक्ष्य और विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है।
सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब का स्थान है। छोटे राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड शीर्ष स्थान पर रहा। इसके बाद जम्मू-कश्मीर, नगालैंड, दादरा एवं नगर हवेली और दमन व दीव, गोवा तथा त्रिपुरा का स्थान है। ये सूचकांक भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात के लिए तैयारी और क्षमता का एक विस्तृत मूल्यांकन करता है।
इस रिपोर्ट को जारी करते हुए नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बी.वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौतों का विस्तार करने के साथ ही मजबूत घरेलू आधार का महत्व बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए इसका अर्थ ऐसे परिवेश को बढ़ावा देना है, जो नए अवसरों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सके और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। साथ ही जिलों में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना सके। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि हाल के वर्षों में कई राज्यों ने समर्पित नीतियों, संस्थानों और बुनियादी ढांचे के माध्यम से अपनी निर्यात दृष्टि को मजबूत करना शुरू कर दिया है।
निर्यात तैयारी सूचकांक में एक सुसंगत एवं आंकड़ा-आधारित पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत निर्यात नीतियों, कारोबारी माहौल, बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता एवं निर्यात परिणामों सहित कई कारकों का मूल्यांकन किया गया है। निर्यात तैयारी सूचकांक राज्यों और जिलों के निर्यात तंत्र की मजबूती, स्थिरता और समावेशिता को आंकने के लिए प्रमाण-आधारित ढांचा प्रदान करता है। इसके माध्यम से उन संरचनात्मक चुनौतियों, विकास के अवसरों और नीतिगत उपायों की पहचान की जाती है, जिनसे राज्यों और जिलों के स्तर पर निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके। इसमें आंकड़े राज्य तथा केंद्र सरकार दोनों के स्रोतों से जुटाए जाते हैं और प्रत्येक संकेतक को उसके महत्व के आधार पर भार प्रदान किया जाता है।

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