
सिवनी, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में बदलते समय का चेहरा अब स्पष्ट नजर आने लगा है। कभी घर की चौखट तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएँ अब आत्मसम्मान और मेहनत के साथ अपने जीवन को संवारने में जुटी हैं। इस जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर नारी शक्ति पूरी आत्मविश्वास के साथ पेट्रोल-डीजल भरते हुए देखी जा सकती हैं। यह उनके लिए केवळ नौकरी नहीं, बल्कि उनके परिवार के जीवन का एक मजबूत सहारा बन चुका है।
सिवनी की सड़कों पर पिछले तीन महीनों से एक महिला अपने ऑटो को चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है। कड़ी धूप, बारिश और सर्दी—हर मौसम में ये महिलाएँ मुस्कान के साथ अपनी ड्यूटी निभाती हैं। उनका कहना है कि इस काम से महिलाओं को बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और रोज़मर्रा की जरूरतें पूरा करने में सहारा मिल रहा है। कई महिलाओं के लिए यह नौकरी आत्मसम्मान की पहली सीढ़ी बन गई है।
सुबह की पहली किरण के साथ ये महिलाएँ अपने ऑटो की चाबी घुमाती हैं। उनके चेहरे पर थकान की जगह जिम्मेदारी का सुकून झलकता है। हर सवारी के साथ उनकी जिंदगी की कहानी आगे बढ़ती है—कभी बच्चों की फीस की चिंता, कभी घर के खर्च की बातें, तो कभी समाज की नजरों से जूझने की मजबूरी। लेकिन इन सबके बीच उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ता।
एक महिला ने कहा, “शुरुआत में लोग मुझे हैरानी से देखते थे और कुछ सवाल भी उठाते थे। लेकिन जब घर का चूल्हा जलाने की जिम्मेदारी सामने हो, तो डर अपने आप पीछे छूट जाता है।” सिवनी जिले के पेट्रोल पंपों पर काम कर रही ये नारी शक्ति इस बदलाव की गवाह हैं। यूनिफॉर्म में सजी ये महिलाएं न केवल ईंधन भरती हैं, बल्कि समाज की सोच को भी नई दिशा दे रही हैं। उनके आत्मविश्वास से यह स्पष्ट होता है कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं किसी भी काम में पीछे नहीं रहतीं।
हिन्दुस्थान समाचार / रवि सनोदिया
