संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी
By: कैलाश चन्द्र
संस्कारित परिवार: जागरूक नागरिक, समरस समाज और संवेदनशील राष्ट्र निर्माण की मूल धुरी
-कैलाश चन्द्र
भारतीय समाज की रचना में परिवार केवल रक्त-संबंधों का केंद्र नहीं बल्कि एक जीवंत संस्कृति, अनुशासन और भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था है। जब दुनिया व्यक्तिगतता, उपभोक्तावाद और क्षणिक सुख की संस्कृति में उलझकर अपने मूल्यों से दूर जा रही है, तब हमारे लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि राष्ट्र-निर्माण किसी एक नीति, किसी एक नेतृत्व या किसी एक विचारधारा से नहीं चलता; उसका वास्तविक केंद्र परिवार होता है। परिवार ही वह स्थान है जहाँ भविष्य की पीढ़ियाँ अपना पहला श्वांस, पहला संस्कार, पहली दृष्टि और पहला जीवन-शिक्षण प्राप्त करती हैं। अतः परिवार में संस्कारों की स्थापना केवल निजी जीवन का विषय नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय प्रश्न है।
बच्चा अपने जन्म से किशोरावस्था...

