Friday, March 6खबर जो असर करे |
Shadow

Tag: महाभारत]

धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

धर्म ही है सृष्टि का संचालक और भारत के पुनरुत्थान का आधार

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी डॉ. मोहन भागवत ने ‘धर्म’ को सृष्टि का संचालक बताया है। उनका कथन है, सृष्टि निर्माण के साथ उसके संचालन के लिए बने नियम ही धर्म हैं। ये नियम विश्वव्यापी हैं। कोई व्यक्ति या वस्तु पूर्णतः अधर्मी नहीं हो सकते। यह प्राचीन ग्रंथों की गहन व्याख्या पर आधारित उनका धर्म के विषय में निष्कर्ष है। श्रीमद्भागवत, मनुस्मृति, पाराशर स्मृति, महाभारत जैसे ग्रंथ ‘धर्म’ को स्वाभाविक नियम के रूप में परिभाषित करते हैं। डॉ. भागवत जी का मूल सूत्र यही है कि ‘धर्म’ ही पूरी सृष्टि का ड्राइवर है। यही श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है “धर्मः सनातनः सर्वस्य मूलं” अर्थात् धर्म सनातन है और समस्त सृष्टि का मूल। भगवान विष्णु स्वरूप में सृष्टि संचालित करते हैं। नियम ‘धर्म’ के रूप में निर्धारित हैं। यहां डॉ. भागवत जल को बहने और अग्नि को जलाने का ‘धर्म’ बताते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा श्रीमद्भागवत पु...
नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंः डॉ. भागवत

नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंः डॉ. भागवत

राष्ट्रीय
नागपुर, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि, मतदान के दौरान सभी उम्मीदवारों को नकारने (नोटा) के बजाय उपलब्ध विकल्पों में से योग्य उम्मीदवार का चयन करना अधिक उचित है। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है। डॉ. मोहन भागवत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य ‘भैय्याजी’ जोशी ने गुरुवार को महाल स्थित नागपुर नाइट हाईस्कूल के मतदान केंद्र पर मतदान किया। मतदान के लिए पहुंचने वालों में ये दोनों सबसे पहले थे। मतदान के बाद डॉ. भागवत ने कहा कि ‘नोटा’ का प्रयोग सभी उम्मीदवारों को नकारने के समान है और यह लोकतंत्र की सबसे खराब स्थिति मानी जा सकती है। इससे वास्तव में अवांछित उम्मीदवारों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। इसलिए उपलब्ध उम्मीदवारों में से योग्य और सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार का चयन क...