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Tag: आपदा प्रबंधन

(अपडेट) झाबुआ: एलपीजी टैंकर पलटने से टली संभावित आपदा

(अपडेट) झाबुआ: एलपीजी टैंकर पलटने से टली संभावित आपदा

मध्य प्रदेश, राज्य
झाबुआ, 31 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर फूलमाल में एलपीजी से भरे टैंकर के पलटने पर कलेक्टर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अध्यक्ष के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन योजना के अंतर्गत तत्परता, सुरक्षा और नियंत्रण उपायों की शुरुआत की गई, जिसके फलस्वरूप संभावित आपदा बिना किसी जनहानि के सफलतापूर्वक टल गई। यह महत्वपूर्ण है कि इस ऑपरेशन में पुलिस, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, गेल इंडिया लिमिटेड, और नगर पालिका की फायर टीम के समन्वित प्रयासों से कार्य सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आपदा की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, गेल इंडिया लिमिटेड, और नगर पालिका की फायर टीम सहित अन्य संबंधित विभागों की टीमें तुर्कित रूप से घटनास्थल पर पहुंची। घटना के बाद एहतियातन फूलमाल चौराहे के आस-पास 800 मीटर की परिधि को संव...
इतिहास के पन्नों में 15 जनवरी : भारत–नेपाल के भीषण भूकंप की दर्दनाक याद

इतिहास के पन्नों में 15 जनवरी : भारत–नेपाल के भीषण भूकंप की दर्दनाक याद

राष्ट्रीय
बिहार, 14 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। 15 जनवरी का दिन इतिहास के पन्नों में भारत और नेपाल के लिए एक त्रासदी के रूप में दर्ज है। वर्ष 1934 में इसी दिन आए विनाशकारी भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी। इस भूकंप का केंद्र भारत के बिहार क्षेत्र और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के आसपास था, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.4 मापी गई। भूकंप के तेज़ झटकों से शहरों और गांवों में इमारतें धराशायी हो गईं। बिहार के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और घर पूरी तरह नष्ट हो गए, वहीं नेपाल में भी भारी जन-धन की हानि हुई। इस प्राकृतिक आपदा में अनुमानित रूप से लगभग 11 हजार लोगों की जान चली गई, जबकि असंख्य लोग घायल और बेघर हो गए। 1934 का यह भूकंप उस दौर की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। सीमित संसाधनों और संचार व्यवस्था के अभाव के कारण राहत और बचाव कार्य भी अत्यंत कठिन रहा। इस त्रासदी ने न केवल तत्कालीन जनजीवन को...