नई दिल्ली । उन्नाव दुष्कर्म में दोषी कुलदीप सेंगर पर कोर्ट के फैसले ने बहन-बेटियों को डरा दिया है। अगर ऐसे दुष्कर्म के दोषी को जमानत मिल रही है तो यह देश में पहला फैसला है। बहन-बेटियां अपने घर से नहीं निकलेंगी। उनकी पढ़ाई नहीं हो पाएगी। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। वहां से हमें न्याय मिलेगा। यह कहते हुए उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के आंसू छलक उठे। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता अपनी माता के साथ रविवार को जंतर मंतर पर सेंगर की जमानत के फैसला का विरोध करने पहुंची थीं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि फैसला सुनाने वाले जज को पैसों की जरूरत हो सकती है तभी इस तरह का फैसला सुनाया है। साथ ही, उन्होंने सीबीआई के जांच अधिकारी पर भी इस तरह के आरोप लगाए हैं।
हिंदी में बहस होती तो जीत कर लाती फैसला
पीड़िता ने कहा कि अगर यह बहस हिंदी में हुई होती तो मैं खुद कोर्ट से यह फैसला जीत के लाती। उन्होंने बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय मांग रही हैं।
हमें मरवाने के लिए एक करोड़ का इनाम
पीड़िता ने कहा कि उनके बच्चे और परिवार असुरक्षित है। उन्होंने कहा कि हमें मरवाने का एक करोड़ रुपये का इनाम रखा है। यह हमारे साथ होगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेता बृज भूषण सिंह सेंगर को अपना मित्र बताते हैं।
सेंगर समर्थकों को भगाया
इसी बीच पीड़िता की मां आरोप लगाते हुए कहती हैं कि हमें मारने के लिए सेंगर ने यहां भी लोगों को भेजा था। लेकिन, यहां लोगों ने उन्हें भगा दिया था। लोगों का धन्यवाद। यह कहते हुए पीड़िता की मां बेहोश हो गईं। उन्हें पुलिस की वैन में सुरक्षा के बीच अस्पताल ले जाया गया। पीड़िता ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कहा है कि वह उनकी बहन जैसी है, वह उनके साथ खड़े हैं और न्याय दिलाएंगे।
सेंगर के समर्थन में पहुंचे लोग
जंतर मंतर पर माहौल तब गरमा गया जब वहां कुलदीप सेंगर की जमानत के फैसले को समर्थन करने कुछ लोग पहुंच गए। पुरुष आयोग संस्था की बरखा त्रेहान अपने साथ कुलदीप सेंगर के समर्थन में पोस्टर लेकर पहुंचीं थी। उन्होंने कहा कि वह सेंगर के मामले में राजनीति हो रही है। उन्होंने कहा कि जो न्यायिक प्रक्रिया उसका पालन करना जरूरी है।
सेंगर के समर्थक के साथ धक्का-मुक्की
उधर, जैसे ही पीड़िता अपनी माता के साथ जंतर मंतर पर पहुंची वैसे ही एक व्यक्ति भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाने लग गया था। इसके बाद पीड़िता की मां ने उन्हें जवाब देना चाह लेकिन वह व्यक्ति इधर-उधर भागने लगा। पीड़िता के साथ आए लोगों ने व्यक्ति के साथ धक्का मुक्की भी की। लेकिन, पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
छात्र संगठनों ने दिया अपना समर्थन
जैसे-जैसे पीड़िता के कदम जंतर मंतर की ओर बढ़ रहे थे। वैसे ही उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। पीड़िता की माता बार-बार बेहोश हो रही थीं। प्रदर्शन के दौरान कड़ी सुरक्षा रही। दिल्ली पुलिस के साथ अर्ध सैनिक की तैनाती देखने को मिली। प्रदर्शन में छात्र संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। एसएफआई, आइसा, दिशा व स्री मुक्ति मोर्चा और भारत की क्रांतिकारी मजदूर पार्टी सहित अलग-अलग छात्र संगठन शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने मांग करते हुए कहा कि इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे पीड़िता के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को सिर्फ कुलदीप सिंह सेंगर तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्त्री विरोधी घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इस पर ठोस कानून बनाया जाना चाहिए। स्त्री मुक्ति लीग से प्रियंवदा ने कहा कि यह फैसला महिलाओं के मनोबल को तोड़ने वाला है। इसे वापस लिया जाना चाहिए।
