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ट्रंप की सहयोगी ने कर दी ममदानी को मेयर पद से हटाने की तैयारी? जानिए रिपब्लिकन का प्‍लान


न्यूयॉर्क। जोहरान ममदानी ने अमेरिका में इतिहास रच दिया है। वह न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम और भारतीय मूल के मेयर बन गए हैं। लेकिन यह बात ट्रंप और उनके सहयोगियों को हजम नहीं हो रही है। इस बीच ट्रंप की समर्थक और रिपब्लिकन प्रतिनिधि एलिस स्टेफेनिक ने साल 2026 के गवर्नर पद के लिए उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया है। वह न्यूयॉर्क की वर्तमान गवर्नर कैथी होचुल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। माना जा रहा है कि स्टेनेफिक ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि न्यूयॉर्क की गवर्नर बनने के बाद वह ममदानी को मेयर पद से हटा सकें।

बता दें कि होचुल ने ही ममदानी का खुलकर समर्थन किया था। होचुल और ममदानी की स्टेफेनिक कट्टर आलोचक हैं। ममदानी की जीत के बाद स्टेफेनिक ने होचुल को अमेरिका की सबसे खराब गवर्नर बताया था। साथ ही न्यूयॉर्क को देश का मोस्ट अनअफोर्डेबल राज्य बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने ममदानी के खिलाफ भी बयान देते हुए उन्हें एंटीसेमाइट, जिहादी और कम्यूनिस्ट बताया।

क्या ममदानी को हटाया जा सकता है
यदि स्टेफेनिक 2026 के चुनावों में होचुल को हराती हैं तो वह कम इस्तेमाल किए जाने वाले राज्यपालीय अधिकार का उपयोग करके मामदानि को हटा सकती हैं। न्यूयॉर्क राज्य के संविधान के तहत, राज्यपाल के पास मेयर और अन्य स्थानीय अधिकारियों को पद से हटाने का अधिकार है। अगर ऐसा होता है कि अमेरिका के सबसे बड़े शहर का शक्ति संतुलन बदल जाएगा।

इतना आसान नहीं होगा
हालांकि यह मैकेनिज्म दशकों से निष्क्रिय है। न्यूयॉर्क चार्टर के मुताबिक मेयर को राज्यपाल द्वारा आरोपों, आरोपों की प्रति उपलब्ध कराने और उनके बचाव में सुनवाई का अवसर देने के बाद पद से हटा दिया जा सकता है। आरोपों की तैयारी और सुनवाई खत्म होने तक, गवर्नर मेयर को तीस दिन से अधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए एक औपचारिक कानूनी प्रक्रिया भी जरूरत है। इसमें आरोप दाखिल करना, संबंधित अधिकारी को उन आरोपों का नोटिस देना, मेयर को उत्तर देने और अपनी रक्षा प्रस्तुत करने का अवसर देना शामिल है।

अगर मेयर को हटा दिया तो क्या
अगर न्यूयॉर्क के मेयर को हटा दिया जाता है तो 90 दिनों के भीतर फिर से चुनाव कराना होगा। हालांकि इस प्रक्रिया पारंपरिक रूप से केवल तब के लिए आरक्षित है, जिसमें मेयर को आधिकारिक कदाचार या सार्वजनिक विश्वास का उल्लंघन दोषी माना जाता है। या फिर मामला किसी अधिकारी की वर्तमान अवधि के दौरान किए गए नैतिक अपराध से संबंधित हो। 1932 में स्टेट सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में इसका जिक्र किया गया है।

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