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आईआईटी मंडी में ‘अभियंता 1.0 इनोवेशन चैलेंज’ की शुरुआत, भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम

मंडी, 12 अक्टूबर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘अभियंता 1.0 इनोवेशन चैलेंज’ शुरू किया है। इस पहल के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है जो देश के वैज्ञानिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देंगे। इनमें भ्रूण की हृदय गति की निगरानी करने वाला डिवाइस, बुजुर्गों के लिए स्मार्ट एयरबैग सिस्टम, त्वचा रोग पहचान प्रणाली, स्ट्रोक पुनर्वास उपकरण और डिजिटल टेलीमेडिसिन जैसे कई नवाचार शामिल हैं।

यह चैलेंज भारत रत्न एम. विश्वेश्वरैया को समर्पित है, जिनकी जन्मतिथि के अवसर पर यह कार्यक्रम शुरू किया गया। इसका उद्देश्य देश में “मेक इन इंडिया” से आगे बढ़कर “इनोवेट इन इंडिया” की अवधारणा को साकार करना है। आईआईटी मंडी की इनोवेशन हब (iHub) और ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन फाउंडेशन (HCI) द्वारा आयोजित इस पहल से युवा इंजीनियर और शोधकर्ता 10 प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करेंगे।

पहला प्रोजेक्ट सीखने की अक्षमता से जूझ रहे बच्चों के लिए न्यूरोफीडबैक प्रणाली विकसित करने का है। यह सिस्टम ईईजी, आई-ट्रैकिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट पेन के माध्यम से बच्चों की सीखने की गति का विश्लेषण करेगा और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार व्यक्तिगत सुझाव देगा।

दूसरा प्रोजेक्ट मातृ एवं भ्रूण स्वास्थ्य की निगरानी से जुड़ा है। यह हल्का, पहनने योग्य डिवाइस गर्भवती महिलाओं को भ्रूण की हृदय गति और स्वास्थ्य संकेतों की जानकारी देगा। एआई एल्गोरिदम के माध्यम से असामान्य गतिविधियों का पता लगाकर स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट किया जाएगा, जिससे गर्भावस्था के दौरान मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।

तीसरा नवाचार एआई संचालित त्वचा रोग पहचान प्रणाली है, जो स्मार्टफोन से ली गई तस्वीरों के आधार पर फंगल संक्रमण, एक्जिमा और अन्य सामान्य रोगों का त्वरित निदान करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभिक उपचार और जागरूकता बढ़ेगी।

चौथा प्रोजेक्ट स्ट्रोक पुनर्वास उपकरण से संबंधित है, जिसे घर पर उपयोग करने योग्य बनाया जाएगा। यह उपकरण स्ट्रोक पीड़ित मरीजों को फिजियोथेरेपी और रिकवरी में मदद करेगा।

पांचवां नवाचार ग्रामीण टेलीमेडिसिन के लिए बहु-कार्यात्मक IoT डिवाइस का विकास है, जो ईसीजी, रक्तचाप, वजन और ऑक्सीजन स्तर जैसी जांचें तुरंत कर सकेगा और 15 मिनट में एआई आधारित प्रारंभिक रिपोर्ट देगा।

छठा उपकरण पारंपरिक स्टेथोस्कोप को ब्लूटूथ-सक्षम डिजिटल डिवाइस में बदलने वाला अटैचमेंट है, जो एआई की मदद से हृदय और फेफड़ों की ध्वनियों का विश्लेषण करेगा।

सातवां प्रोजेक्ट बुजुर्गों के लिए स्मार्ट एयरबैग सिस्टम है, जो सेंसर के माध्यम से गिरने से पहले ही संकेत देकर चोटों से बचाव करेगा।

इसके अलावा बायोमीट्रिक कैशलेस भुगतान प्रणाली, एआर-वीआर आधारित शिक्षा किट और एयरपोर्ट सुरक्षा संरचना पर आधारित प्रोजेक्ट भी इस चैलेंज का हिस्सा हैं।

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि “एम. विश्वेश्वरैया केवल एक अभियंता नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मा थे। यह इनोवेशन चैलेंज उनके आत्मनिर्भर और सृजनशील भारत के सपने को नई ऊर्जा देगा।”

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