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प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का संसद में पहला संबोधन

काठमांडू, 02 फ़रवरी (प्रेस ब्यूरो)। नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को संघीय संसद के अंतर्गत राष्ट्रीय सभा को पहली बार संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा संयोग और परिस्थितियों का परिणाम है और यह संकेत दिया कि ऐसा क्षण दोबारा आना मुश्किल हो सकता है।

पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन–जी आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री बनीं कार्की ने स्पष्ट किया कि वह योजनाबद्ध तरीके से सत्ता में नहीं आईं। उन्होंने कहा कि संसद में खड़े होकर बोलना उनकी कोई व्यक्तिगत आकांक्षा नहीं थी, बल्कि यह समय और परिस्थितियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह मेरे जीवन का ऐसा क्षण है, जिसके बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था। न यह मेरी चाह थी, न ही मैंने इसे खोजा, बल्कि परिस्थितियां मुझे यहां ले आईं। आज जो अवसर मुझे मिला है, शायद वह जीवन में फिर दोहराना कठिन होगा। मैंने इसकी कभी उम्मीद भी नहीं की थी।

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा कि शासकीय त्रुटियों और आचरणगत कमजोरियों के कारण ही जेन–जी विद्रोह हुआ। यह विद्रोह एक ऐसा आईना है, जिसमें हम अपनी ही शासकीय गलतियों और आचरणगत कमजोरियों को देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान संविधान द्वारा परिकल्पित संघीय गणतांत्रिक शासन व्यवस्था, नागरिक स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों और सुशासन सहित लोकतांत्रिक मूल्यों पर खरा न उतर पाने के कारण यह आंदोलन हुआ।

युवा पीढ़ी सहित समूचे नेपाली समाज की आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि नागरिक राज्य के संसाधनों, साधनों और अवसरों तक समान पहुंच, रोजगार और गुणवत्तापूर्ण जीवन की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि इन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य के तीनों अंग—कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका—को जिम्मेदारी के साथ काफी पहले ही सक्रिय हो जाना चाहिए था। इसी कारण हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

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