
रायगढ़, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में गारे पेलमा सेक्टर-1 परियोजना से संबंधित प्रस्तावित जनसुनवाई पिछले एक महीने से अधिक समय से प्रशासनिक कारणों से निरस्त है, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच इस परियोजना को लेकर असंतोष और विरोध का माहौल अभी भी बना हुआ है।
परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई के निरस्त होने के बावजूद उनकी आशंकाएं खत्म नहीं हुई हैं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं और पर्यावरणीय नुकसान, विस्थापन और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक उन्हें परियोजना से जुड़ी वास्तविक जानकारी पारदर्शिता के साथ नहीं दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता और उन्हें पूर्ण विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक वे अपनी जमीन देने के लिए सहमत नहीं होंगे।
क्षेत्र में यह भी देखने को मिला है कि जनसुनवाई के निरस्त होने के बावजूद ग्रामीण एकजुट हैं और अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि किसी भी निर्णय से पूर्व प्रभावित परिवारों की सहमति और चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
वहीं दूसरी ओर, इस विषय पर सक्षम अधिकारियों से बातचीत के दौरान ज्ञात हुआ कि ग्रामीणों के विरोधों और कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा प्रेरित नकारात्मक राजनीति के कारण भारी उपद्रव, आगजनी और संस्थान के माइंस कार्यालय को नुकसान पहुँचाया गया है। कंप्यूटर, दस्तावेज और सर्वे उपकारणों को जलाकर कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार चल रहा है। ग्रामीमों के मध्य छिपे इन उपद्रवियों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और वे आज भी स्वतंत्रता से समाज में घूम रहे हैं और दहशत फैला रहे हैं।
