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धान खरीद एवं भंडारण व्यवस्था में सूखत एवं चूहा आदि कीटों के द्वारा धान के नुकसान के आरोप तथ्यों से परे -साय सरकार

रायपुर, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में धान खरीद एवं भंडारण व्यवस्था में सूखत एवं चूहा आदि कीटों के द्वारा धान के नुकसान को लेकर **साय सरकार** ने कहा है कि कुछ स्थानों पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह तथ्यों से परे है। वस्तुस्थिति यह है कि धान भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में आंशिक गिरावट (**सूखत**) एक स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है, जो वर्षों से चली आ रही है और देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखी जाती है।

वहीं **छत्तीसगढ़ विधानसभा** नेता प्रतिपक्ष **डॉ. चरणदास महंत** ने प्रदेश में धान खरीद की बदहाली और किसानों द्वारा आत्महत्या के प्रयास की बढ़ती घटनाओं पर सरकार पर जमकर निशाना साधा है। इसके साथ ही धान खरीद का समय बढ़ाने की मांग है। **डॉ. महंत** ने कहा कि **टोकन तुंहर हाथ** ऐप और **बायोमेट्रिक** सर्वर फेल हो चुके हैं। ऑनलाइन खरीद बंद होने के कारण हजारों किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। खरीद की अंतिम तिथि **31 जनवरी** नजदीक आने से किसानों में डर का माहौल है कि उनका धान खेतों में ही सड़ जाएगा।

उल्लेखनीय है प्रदेश में धान खरीद के दौरान **कवर्धा**, **महासमुंद** और अन्य जिलों की समितियों में चूहों द्वारा करोड़ों रुपये का धान खाने का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री **भूपेश बघेल**, नेता प्रतिपक्ष **डॉ. चरण दास महंत** सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं ने **भाजपा** सरकार पर निशाना साधा है। वहीं **भाजपा सांसद** **बृजमोहन अग्रवाल** ने चूहों के इलाज के लिए सरकार द्वारा बिल्ली की व्यवस्था करने की बात कही है।

वहीं राज्य शासन ने बुधवार देर शाम स्पष्ट किया है कि सरकारी अभिलेखों के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष **2019-20** में **6.32** प्रतिशत और **2020-21** में **4.17** प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सूखत कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली भौतिक-तकनीकी प्रक्रिया है। धान संग्रहण केंद्रों में नमी, तापमान, भंडारण अवधि, परिवहन और वातावरण के प्रभाव से धान में प्राकृतिक रूप से कुछ प्रतिशत वजन घटता है। इसे वैज्ञानिक रूप से “**मॉइस्चर लॉस**” या “**ड्रायिंग लॉस**” कहा जाता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता लेकिन इसे नियंत्रित, मापा और पारदर्शी बनाया जा सकता है।खरीफ विपणन वर्ष **2024-25** में लगभग **3.49** प्रतिशत सूखत की संभावना व्यक्त की गई है, जो पूर्व वर्षों के औसत के अनुरूप है और असामान्य नहीं है।

इस पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता **चरणदास महंत** ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव में ‘**मोदी की गारंटी**’ का ढिंढोरा पीटने वाली **भाजपा सरकार** आज किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम और सम्मान देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि छत्तीसगढ़ जैसा कृषि प्रधान राज्य, जिसे ‘**धान का कटोरा**‘ कहा जाता है, वहां आज किसान अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। **कोरबा** और **बागबाहरा** जैसे में किसानों का आत्महत्या के लिए मजबूर होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में सुशासन दम तोड़ चुका है। जमीनी हकीकत में किसान टोकन के लिए हफ़्तों इंतज़ार कर रहे हैं। ‘टोकन तुंहर हाथ‘ ऐप और बायोमेट्रिक सर्वर फेल हो चुके हैं, जिसके कारण अन्नदाता हताशा में घातक कदम उठाने पर विवश है।

पूर्व मुख्यमंत्री **भूपेश बघेल** ने इस मुद्दे को लेकर इंटरनेट मीडिया **एक्स** पर लिखा, “चूहे की गारंटी, चूहे का सुशासन।” उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों से प्रदेश चूहों के कारण राष्ट्रीय पटल पर छाया हुआ है। ये चूहे बेहद भूखे हैं और पूरे प्रदेश को कुतर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ये चूहे कहां से आए हैं, **नागपुर** से या **गुजरात** से। उन्होंने लिखा कि प्रदेश धान का कटोरा है, यहां के चूहे इतने भूखे नहीं हैं। **भूपेश बघेल** ने आरोप लगाया कि **कवर्धा**, **महासमुंद**, **जशपुर** सहित अन्य जिलों में अब तक **30 करोड़** रुपये का धान चूहे खा गए हैं। उन्होंने पूछा कि इन चूहों को संरक्षण कौन दे रहा है।

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