फिल्म अस्सी की समीक्षा: जब हर 20 मिनट पर झकझोरती है स्क्रीन और आईना बन जाता है सिनेमा
हम अक्सर खबरों को स्क्रोल करके आगे बढ़ जाते हैं। एक और अपराध, एक और हेडलाइन, एक और बहस। लेकिन क्या होता है उस एक 'हेडलाइन' के बाद? अस्सी उसी अनकहे हिस्से को सामने लाती है, जहां आंकड़े इंसान बनते हैं और इंसान जख्म। भारत में यौन अपराधों के आंकड़े सिर्फ सरकारी फाइलों में दर्ज संख्या नहीं हैं, वे उन घरों की चुप्पी हैं जहां हंसी अचानक गायब हो जाती है। निर्देशक अनुभव सिन्हा एक बार फिर वही करते हैं, जिसके लिए वे जाने जाते हैं, सुविधाजनक सिनेमा नहीं, असुविधाजनक सच। 'मुल्क' और 'थप्पड़' के बाद इस बार उनके साथ हैं तापसी पन्नू, और नतीजा है एक ऐसी फिल्म जो आपको देखती भी है और परखती भी। टी-सीरीज द्वारा निर्मित 'अस्सी' 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। लेकिन सवाल रिलीज डेट का नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम उस सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, जिसे यह फिल्म हमारे सामने रखती है?
कहानी परि...









