क्या ट्रंप नोबेल में मात के बाद भी शांति दूत बने रहेंगे?
ऋतुपर्ण दवे
बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाले ट्रंप हाथ मलते रह गए। शांति के नोबेल के लिए चंद देशों से खुद को नामित कराने वाले अड़ीबाज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रप के मुकाबले बेहद कम चर्चित और दुनिया में अलग पहचान रखने वाली एक महिला को मिलना शायद ट्रंप को उनकी असलियत या औकात बताने को काफी है। वैसे भी हर पुरस्कार के लिए नियम होते हैं, लंबी फेहरिस्त होती है और कारण होते हैं। ट्रंप कहीं से भी इसमें फिट नहीं बैठते थे। लेकिन उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति होने का गुमान था। इसीलिए वो यह जानते हुए भी कि पुरस्कार के लिए नामित होने और औपचारिकताओं के पूरा करने की प्रक्रिया को भी शायद अपनी धौंस से धता बताने की जुगाड़ में थे, जो हो न सका। यह भी सच है कि शायद यह पहला मौका होगा जब पुरस्कार मिलने वाले के नाम की चर्चा के बजाए न मिलने वाले का नाम और उसका रंज सु...








