मुस्लिम पक्ष का तर्क… भोजशाला राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद के रूप में दर्ज… मंदिर होने का कोई प्रमाण नहीं
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में बुधवार को भोजशाला विवाद (Bhojshala controversy) पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने अपनी बात रखते हुए दावा किया कि पुराने सरकारी कागजों यानी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में यह जगह हमेशा से एक मस्जिद के रूप में दर्ज रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूद इतिहास के स्रोतों में ऐसा कोई साफ जिक्र नहीं मिलता कि राजा भोज ने यहां सरस्वती मंदिर बनवाया था। बता दें कि हिंदू समाज इस जगह को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। इस पूरी जगह की देखरेख ISI कर रहा है।
खुद को सूफी संत मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती के वंशज और सज्जादानशीन (किसी सूफी दरगाह, खानकाह या धार्मिक स्थल का आध्यात्मिक प्रमुख, गुरु या उत्तराधिकारी) बताने वाले काजी मोइनुद्दीन की ओर से उनके वकील नूर अहमद शेख ने इंदौर पीठ ...









