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हिंदू होने का मर्म है विविधता में एकता और आत्मभूतेषु भाव

हिंदू होने का मर्म है विविधता में एकता और आत्मभूतेषु भाव

लेख
By: -------------- भारत एक देश होने के साथ ही एक चेतना है, एक संस्कार है, एक जीवन दृष्टि है। यह वह भूमि है जहां हजारों वर्षों से मानवता को जीने की कला सिखाई गई, जहां विविधता को शक्ति के रूप में देखा गया और जहां अंत:चेतना को ही एकता के लिए समाज की आधारशिला बनाया गया। इसी भारत के स्‍व को स्वर देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज जो कहा है, वह हम सभी के लिए गहन रूप से विचारणीय है। वस्‍तुत: ये भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला वैचारिक उद्घोष है। जिसमें कि उनके शब्द हर हिंदू, हर सनातनी और हर भारतवासी के भीतर यह भाव जगाते हैं कि इस राष्ट्र का चरित्र हमारे आचरण से बनता है और इसकी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। डॉ. भागवत का यह कथन है कि भारत एक भौगोलिक इकाई से ऊपर एक चरित्र है, जोकि भारतीय सभ्यता के मूल स्वभाव को रेखांकित करता है। भारत की पहचान उसकी ...
प्रधानमंत्री ने पोंगल पर काशी-तमिल संगमम को सांस्कृतिक एकता का उदाहरण बताया

प्रधानमंत्री ने पोंगल पर काशी-तमिल संगमम को सांस्कृतिक एकता का उदाहरण बताया

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 15 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोंगल के अवसर पर काशी-तमिल संगमम के विस्तार को देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आज परंपराओं, भाषाओं और समुदायों को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बन चुकी है, जिसने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को और गहराई दी है। प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा में लिखे अपने लेख में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है, जो सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट्स में कहा कि काशी-तमिल संगमम भारत की विविधता में निहित एकता का जीवंत उदाहरण है। यह पहल सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी समझ और स...