वाशिंगटन।। अमेरिका ने हाल ही में रूस की 2 सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर बैन लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को रूस की 2 सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। रूस को यूक्रेन जंग रोकने का दबाव बनाने के लिए अमेरिका द्वारा उठाए गए इस कदम से अब चीन पीछे हटता हुआ नजर आ रहा है।
रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद चीन की सरकारी तेल कंपनियों ने रूसी तेल की खरीददारी रोक दी है।
सूत्रों ने गुरुवार को बताया है कि चीन की प्रमुख कंपनियों, पेट्रोचाइना, सिनोपेक, सीएनओओसी और झेनहुआ ऑयल ने रूसी तेल की आयात बंद करने का फैसला लिया है। अगर दावा सही हुआ तो यह रूस के लिए बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है और रूस के मुनाफे पर भी इसका बड़ा असर होगा।
जानकारी के मुताबिक चीन के इस कदम से रूस के तेल की मांग में भारी गिरावट आने की आशंका है, जिससे रूस को वैकल्पिक खरीददारों की तलाश करनी पड़ेगी। वहीं इस उथल पुथल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी इजाफा होने की संभावना बन गई है। बता दें कि चीन समुद्र के रास्ते लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रूसी तेल आयात करता है। हालांकि इसका ज्यादातर हिस्सा आमतौर पर स्वतंत्र रिफाइनर द्वारा खरीदा जाता है।
इससे पहले अमेरिका ने महीनों से अटकी कूटनीति और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रूख से निराश होकर रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो महासचिव मार्क रूट की मेजबानी करते हुए वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “आज एक बहुत बड़ा दिन है। देखिए, ये बहुत बड़े प्रतिबंध हैं। ये रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों के खिलाफ हैं। हमें उम्मीद है कि युद्ध अब समाप्त हो जाएगा। हमने अभी-अभी विभिन्न प्रकार की मिसाइलों और अन्य सभी चीजों के बारे में बात की है जिन पर हम विचार कर रहे हैं। लेकिन हमें नहीं लगता कि इसकी जरूरत होगी।” वहीं ट्रंप से जब पूछा गया कि प्रतिबंधों को इतना कठोर क्यों किया गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे लगा कि अब समय आ गया है। हमने बहुत इंतजार किया है।”
