
बैकुंठपुर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। खेतों को समय पर पानी प्राप्त होने पर किसान की मेहनत रंग लाती है और उनकी जिंदगी में खुशहाली आती है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चिल्का के वनवासी किसान गुरचरन सिंह की कहानी इसी सत्य को उजागर करती है। पहले सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण खेती से निराश होकर मजदूरी करने को मजबूर रहे गुरचरन अब रबी फसल और मछली पालन से दोहरी आमदनी कमा रहे हैं।
अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित गुरचरन सिंह के पास पारिवारिक बंटवारे में मिली लगभग पांच एकड़ कृषि भूमि है। पहले, सिंचाई के अभाव में वे पूरी तरह बारिश पर निर्भर थे। जब बारिश कम होती थी, तो उनकी फसलें खराब हो जाती थीं और रबी की खेती करने की कोई उम्मीद नहीं रहती थी। ऐसे समय में उन्हें परिवार का खर्च चलाने के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी।

पिछले वर्ष ग्राम पंचायत की कार्ययोजना के दौरान गुरचरन सिंह ने अपने निजी खेत में मनरेगा योजना के आधार पर डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया। ग्राम सभा की अनुशंसा के बाद करीब दो लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली और चिल्का ग्राम पंचायत को निर्माण एजेंसी बनाया गया। यह काम समय पर पूरा हुआ और अब यह उनकी फसल के लिए एक जीवनरेखा साबित हो चुका है।
डबरी में पर्याप्त जल भंडारण होने से अब सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध है। गुरचरन सिंह बताते हैं कि अब उनकी धान की फसलें पानी की कमी से खराब नहीं होती और रबी में वे अच्छे गेहूं की पैदावार हासिल कर रहे हैं। साथ ही, घर की बाड़ी में आलू, टमाटर, मिर्च, प्याज और गोभी जैसी सब्जियों की खेती से भी उन्हें हर सप्ताह आमदनी हो रही है, जिससे उनके घरेलू खर्च आसानी से निकलते हैं। इसके अलावा, इस वर्ष उन्होंने डबरी में मछली के बीज डालकर मछली पालन भी शुरू किया है, जिससे उनकी अतिरिक्त आय का एक मजबूत साधन विकसित हो गया है।
सिंचाई सुविधाएं और बहुआयामी कृषि के माध्यम से गुरचरन सिंह अब न केवल आत्मनिर्भर हो गए हैं, बल्कि उनका जीवन स्तर भी ऊँचा हुआ है। उनकी यह सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।
