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अभाव से अवसर तक: नीति, नियोजन और विकास का भारतीय अनुभव

अभाव से अवसर तक: नीति, नियोजन और विकास का भारतीय अनुभव

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-कैलाश चन्द्र इतिहास बीते समय की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, वह वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा तय करने का सबसे विश्वसनीय साधन होता है। जब हम भारत के आर्थिक इतिहास को देखते हैं, विशेषकर 1950 से 1991 तक के दौर को, जिसे आमतौर पर “लाइसेंस-परमिट राज” कहा जाता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह एक आर्थिक नीति से अधिक एक ऐसी व्यवस्था थी जिसने देश के आम नागरिक के जीवन, उद्योगों की गति और विकास की दिशा, तीनों को गहराई से प्रभावित किया। स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने गरीबी, संसाधनों की कमी, औद्योगिक पिछड़ापन और असमानता जैसी गंभीर चुनौतियाँ थीं। ऐसे समय में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में एक नियंत्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया, जिसका उद्देश्य सीमित संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना था। उस समय सोवियत संघ का नियोजित आर्थिक मॉडल प्रभावी माना जा रहा था, इसलिए भारत ने भी उत्पादन, वितरण औ...
भारत में बाल मृत्यु दर में गिरावट यानी बालकों के हित सही दिशा में जा रहा देश

भारत में बाल मृत्यु दर में गिरावट यानी बालकों के हित सही दिशा में जा रहा देश

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डॉ. निवेदिता शर्मा संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना की है। दरअसल, हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर उजागर किया है। यूएनआईजीएमई की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाकर दुनिया को एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेंद्र मोदी ने भी इसे देश की सामूहिक सफलता बताया और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सतत प्रयासों की सराहना की है। आंकड़ों में झलकती ऐतिहासिक सफलता रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में जहां नवजात शिशु मृत्यु दर 57 प्रति हजार जीवित जन्म थी, वह 2024 में घटकर 17 रह गई है, जो लगभग 70 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। इसी प्रकार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 127 से घटकर 27 प्र...
होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

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कैलाश चन्द्र भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है। वस्‍तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं। होलिका की वास्तविक कथा होलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य...
शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट

शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट

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By: डॉ. अवधेश कुमार यादव शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट डॉ. अवधेश कुमार यादव केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के संघीय बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 1,39,289.48 करोड़ का अनुमानित प्रावधान किया गया है, जो विकसित भारत-2047 की मजबूत नींव रखने वाला कदम माना जा रहा है। यह राशि कुल बजट व्यय का लगभग 2.6 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 8.27 प्रतिशत अधिक है तथा शिक्षा मंत्रालय के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। हालांकि, यह धनराशि एनईपी-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य (शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत व्यय) से काफी कम है लेकिन वृद्धि मुद्रास्फीति से ऊपर होने के कारण एनईपी के क्रियान्वयन, विशेषकर अनुसंधान, नवाचार, स्किलिंग तथा शिक्षा-रोजगार संबंध स्थापित करने के क्षेत्रों में गति प्रदान करेगी। इस कुल आवंटन को शिक्षा मंत्रालय के दो प्...
अमेरिकी टैरिफ कटौती में भारत से ज्यादा अमेरिका का हित

अमेरिकी टैरिफ कटौती में भारत से ज्यादा अमेरिका का हित

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By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में कई बार फैसले तत्काल फायदे से अधिक दूरगामी मजबूरियों का नतीजा होते हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी ऐसा ही एक निर्णय है, जिसे सतही तौर पर भारत के पक्ष में बड़ी जीत माना जा रहा है, किंतु गहराई से देखने पर यह कदम अमेरिका के अपने घरेलू हितों, खासकर महंगाई से जूझते आम अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने की मजबूरी का परिणाम अधिक नजर आता है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत का धैर्य, संतुलित कूटनीति और दीर्घकालिक सोच आखिरकार रंग लाती दिखाई दी है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने टैरिफ को एक राजनीतिक और रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और यहां तक कि भारत जैसे मित्र देशो...
कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली

कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली

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By: प्रयाग पाण्डे कुमाऊं में सांस्कृतिक लोक उत्सव है होली प्रयाग पाण्डे हिमालय की गोद में बसा कुमाऊं अंचल न केवल अपने नैसर्गिक सौंदर्य, सुदीर्घ और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी विख्यात है, बल्कि यहां मनाई जाने वाली होली का भी अंदाज निराला है। यही वजह है कि कुमाउंनी होली की विशिष्ट पहचान है। अपना अनोखा रंग है। यहां की होली तन को ही नहीं रंगती, मन को भी उमंग से लबालब भर देती है। कुमाऊं की होली में आंचलिक विशिष्टता है। अनूठा सौंदर्य बोध है। रंग, राग और रागनियों का अदभुत समावेश है। ऋतुराज वसंत को यौवन का सूचक माना जाता है। वसंत ऋतु के आते ही समूची प्रकृति का यौवन एकाएक खिल उठता है। प्रकृति रंग -बिरंगी हो जाती है। विशिष्ट सुगंध और रंग लिए फूल खिलने लगते हैं। देश के अलग - अलग ्सों में लोग अपने -अपने अंदाज में वसंतोत्सव के रंग के आगोश में डूब जाते हैं। भारत के कोने -कोने में राग -रं...
सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

लेख
By: परिचय दास सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास परिचय दास वसंत की प्रथम आहट के साथ ही सहजन के पेड़ ने अपनी शाखाओं को नवजीवन के उजास से भर लिया। हल्की ठंडी हवा, धूप की धीमी परछाइयां और कोयल की आवाज के बीच सहजन के फूल अपनी नाज़ुक पंखुड़ियों को खोलने लगे। इन फूलों में एक अलौकिक सादगी थी, जैसे किसी गजल का पहला मिसरा-अनायास, लेकिन भीतर तक स्पंदित कर देने वाला। इन छोटे-छोटे सफेद फूलों की सुगंध में स्मृतियों का एक संसार बसता था। गांव की वह पगडंडी, जहां दुपहरिया की उनींदी हवा में सहजन की डालियां झूलती थीं। उनकी छांव में खेलते बच्चे, दोपहर की थकान से आंखें मूंदकर सुस्ताते किसान और किसी कोने में बैठी कोई स्त्री, जो फूलों को बटोर कर उनकी सब्ज़ी बनाने की सोच रही थी। सहजन का फूल केवल फूल नहीं था, यह किसी विरासत की तरह अगली पीढ़ी को सौंपा जाने वाला एक गीत था-मौन में गाया हुआ लेकिन दिल की गहराइयो...
आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट

मध्य प्रदेश, लेख
• डॉ. मोहन यादव भोपाल! भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता...
इतिहास का इतिहास

इतिहास का इतिहास

लेख
By: हृदयनारायण दीक्षित इतिहास का इतिहास - हृदयनारायण दीक्षित गाँधीजी जीवित होते तो आज 156 साल के होते। परसों उनकी पुण्यतिथि थी। वे बहुत गहराई से याद किए गए। उन्होंने विश्व इतिहास में हस्तक्षेप किया और काल की अखण्ड सत्ता को प्रभावित किया। काल है भी अखण्ड सत्ता। सारी घटनाएं समय के भीतर होती हैं। अथर्ववेद (19.53-54) में भृगु कहते हैं “काल-अश्व विश्व-रथ का संवाहक है। काल ही पिता है, वही आगे पुुत्र होता है। काल में प्राण हैं, मन हैं, सारे नाम हैं, काल की अनुकूलता ही आनंद है। काल स्वयंभू है। काल के द्वारा ही भूत और भविष्य पैदा हुए हैं आदि आदि।” समय पकड़ में नहीं आता। घटनाएं घटती हैं, घटना अतीत है। अतीत की घटनाओं का यथातथ्य संकलन इतिहास है। प्राचीन राष्ट्र की घटनाएं करोड़ों की संख्या में होती हैं। भारत ऐसा ही राष्ट्र है। मूलभूत प्रश्न है कि घटनाओं के संकलन में संकलनकर्ता की रूचि क्या है...
प्रतिभा पलायन के बीच ईयू ट्रेड डील का लाभ लेने को हम कितने तैयार हैं!

प्रतिभा पलायन के बीच ईयू ट्रेड डील का लाभ लेने को हम कितने तैयार हैं!

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को परिवर्तनकारी समझौता कहा है। वहीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से हर साल करीब 4 अरब यूरो (43 हजार करोड़ रुपये) के टैरिफ कम होंगे और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे। इस वक्‍त भारत और ईयू मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 फीसद और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई सा अपने पास रखते हैं। कहा जा रहा है कि यह समझौता व्यापार संबंधों में विविधता लाने और अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, इससे हर साल ड्यूटी में चार अरब यूरो की बचत होगी। अब ये बचत वास्‍तव में कितनी सच होगी ये आनेवाला वक्‍त बताएगा, किंतु आज बड़ा सवाल है कि हम चीन की तुलना में ईयू को अपना सामान बेचने के लिए कितने तैयार हैं। इसके लिए जो ...