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मालवा में कहाँ गए पितरों के दूत? कौवों के विलुप्त होने की कहानी

मालवा में कहाँ गए पितरों के दूत? कौवों के विलुप्त होने की कहानी

लेख, विशेष समाचार
अशोक झलोया मंदसौर, नीमच, रतलाम सहित मालवा क्षेत्र में पितरों के दूत कहे जाने वाले कौवे इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध की थाली का भोग खाने के लिए भी मौजूद नहीं हैं। श्राद्ध पक्ष में यह विषय लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। कितनी भी आवाज लगाओ, कौवे नहीं आते। पहले गांव-गांव में आवाज लगाने पर घर के आंगन और छत पर श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने के लिए कौवों की भरमार होती थी। परिजन बड़ी उम्मीद से कौवों को बुलाते हैं, धार्मिक मान्यता है कि कौवे के माध्यम से ही पितरों तक श्रद्धा का भोजन पहुंचता है।अब श्राद्ध में भटकते हे लोगपितृपक्ष में पहले गाँव-गाँव में सुबह कांव-कांव से नींद खुलती थी। इस बार मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर-मालवा, उज्जैन में स्थिति यह है कि श्राद्ध का भोग लगाने के लिए कौवा ही नहीं मिल रहा। लोगों को मजबूरी में गाय और कुत्ते को भोग लगाना पड़ रहा है। यह केवल धार्मिक संकट नहीं, पर्यावरण ...
डिजिटल युद्ध के झांसे में युवा वर्ग

डिजिटल युद्ध के झांसे में युवा वर्ग

लेख
सुरेश हिंदुस्तानी कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति या समाज को उद्देश्य विहीन करने के लिए उसको किसी विषय में ऐसा उलझा दिया जाए, जो उसकी दिशा को बदल दे। आज सोशल मीडिया पर बहुत बड़े पैमाने पर यही खेल चल रहा है। तर्क और कुतर्क के सहारे नैरेटिव गढ़ने का यह प्रयास निश्चित ही देश के लिए घातक ही कहा जाएगा। आज सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रचार में भी यह बात गहरे तक दिखाई देती है। समाज को इससे निकलने का प्रयास करना चाहिए, नहीं तो आने वाला समय अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा ही होगा। खास बात यह है कि इस नैरेटिव को युवा वर्ग और समाज के बीच ले जाने का कार्य कुछ राजनीतिक दल के नेता कर रहे हैं। आज नैरेटिव चलाने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग भी किया जा रहा है। जो एक प्रकार से युद्ध के रूप ले चुका है। आज सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग समाज में भेद पैदा करने और युवाओं के मानस को भ्रमित करने ...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

लेख, विशेष समाचार
डॉ. मोहन यादव भोपाल! यशस्वी नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में ढाई दशक की गौरवपूर्ण यात्रा पर विशेष राजनीति के मैदान में ऐसे अनेक नेता और जननेता हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इनमें कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने गए, तो कुछ ने अपने राजनीतिक कौशल से अलग पहचान बनाई। लेकिन ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो संगठन से निकलकर मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकुशलता की मिसाल कायम करें और आगे चलकर प्रधानमंत्री के रूप में न केवल देश की राजनीति और शासन-व्यवस्था को नई दिशा दें, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाये। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंन...
गणेशोत्सव : प्रथम पूज्य गणपति में समाहित है बुद्धि, विवेक और मंगल का संदेश

गणेशोत्सव : प्रथम पूज्य गणपति में समाहित है बुद्धि, विवेक और मंगल का संदेश

लेख, विशेष समाचार
देशभर में गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 14 सितंबर से शुरू होने वाले इस महोत्सव की धूम 25 सितंबर तक रहेगी। लोग श्रद्धा-भक्ति के साथ भगवान गणेश का पूजन-अर्चन कर संपूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। वास्तव में विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, गणनायक, एकदंत, लंबोदर और गजानन जैसे अनेक नामों से पूजे जाने वाले भगवान गणेश भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में विशिष्ट स्थान रखते हैं। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में प्रथम पूज्य के रूप में गणपति का स्मरण करने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें बुद्धि, विवेक, विद्या और शुभारंभ का देवता माना गया है। यही कारण है कि विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, पूजा, व्यापार और शिक्षा जैसे मांगलिक कार्यों में सबसे पहले गणेश पूजन किया जाता है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प...
दुबई से मप्र के युवाओं के लिए रोजगार की नई राह खोलने की तैयारी

दुबई से मप्र के युवाओं के लिए रोजगार की नई राह खोलने की तैयारी

लेख
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को निवेश, रोजगार और निर्यात के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दुबई दौरा उस व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखना चाहिए, जिसमें प्रदेश को देश के भीतर निवेश के विकल्प के साथ-साथ वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक आकर्षक गंतव्य बनाने का प्रयास दिखाई देता है। एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री की भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मध्यप्रदेश अब निवेश के लिए इंतजार करने के बजाय निवेशकों तक स्वयं पहुंच रहा है। दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित “एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग” जैसे वैश्विक मंच पर 180 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, निवेशकों, कंपनियों और सोवरिन वेल्थ फंड्स के बीच मध्यप्रदेश की उपस्थिति राज्य की बदलती आर्थिक आकांक्षाओं को सामने रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027...
अमेरिका में एकबार फिर हिंदुत्व का जयघोष

अमेरिका में एकबार फिर हिंदुत्व का जयघोष

लेख, विशेष समाचार
डॉ. मयंक चतुर्वेदी न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन भारतीय चिंतन की उस व्यापक दृष्टि को सामने लाता है, जिसमें विविधता के बीच मानवता की एकता को आधार माना गया है। ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ अंतरधार्मिक संवाद में भागवत ने धर्म, हिंदुत्व, सामाजिक समरसता, सेवा, राजनीति और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उनके संबोधन की खास बात यह रही कि उन्होंने हिंदुत्व को किसी समुदाय के विरोध अथवा बहिष्कार के विचार से अलग करते हुए मानव गरिमा और सभी पंथों के सम्मान से जोड़ने का प्रयास किया। विविधता में एकता का भारतीय विचार भागवत ने कहा कि दुनिया में धर्म और संस्कृतियां अनेक हैं। उनकी पूजा पद्धतियां, मान्यताएं और कर्मकांड अलग हो सकते हैं, मगर मनुष्य की मूल पहचान एक है। उन्होंने विविधता को समाप्त करने के बजाय उसे स्वीकार करने, उसका सम्म...
विकसित भारत के लिए सिविल सेवा परीक्षा में चाहिए नया प्रतिमान

विकसित भारत के लिए सिविल सेवा परीक्षा में चाहिए नया प्रतिमान

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-अभिषेक शुक्ल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की वर्तमान संरचना में औपनिवेशिक प्रशासनिक व्यवस्था की ऐतिहासिक छाप दिखाई देती है। व्यापक सामान्य ज्ञान, अत्यधिक विस्तृत पाठ्यक्रम, स्मृति-आधारित तैयारी और वर्णनात्मक उत्तर लेखन पर निर्भरता इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। यह व्यवस्था उस समय की प्रशासनिक आवश्यकताओं के लिए उपयोगी रही होगी लेकिन आज की जटिल और तकनीक प्रधान शासन व्यवस्था में इसके पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता स्पष्ट है। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस परिवर्तन की सफलता केवल आर्थिक विकास, आधुनिक आधारभूत संरचना और तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं होगी। शासन की गुणवत्ता, प्रशासनिक संस्थाओं की क्षमता एवं योग्य मानव संसाधन का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। इस दृष्टि से भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की वर्तमान संरचना पर गंभीर और व्यापक पुनर्विचार आवश्यक है। भारतीय प्रशा...
रक्षाबंधन : एक राखी, अनेक संकल्प

रक्षाबंधन : एक राखी, अनेक संकल्प

लेख, विशेष समाचार
डॉ. वंदना सेन “येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा-सूत्र से मैं तुम्हें बाँधता हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम अडिग रहना, अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना। रक्षाबंधन पर धागों पर बंधन एक संकल्प है। वह धागा राखी का नहीं, रिश्तों का होता है। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बाँधती है तो वह केवल धागा नहीं बाँधती। वह अपने बचपन को बाँधती है, अपनी स्मृतियों को बाँधती है, अपने विश्वास को बाँधती है। उसकी आँखों में एक मौन प्रार्थना होती है- “भैया! जीवन चाहे जितना बदल जाए, हमारे रिश्ते का यह विश्वास कभी मत बदलना।” और भाई भी जब बहन की ओर देखता है तो उसके मन में एक संकल्प जन्म लेता है- “तुम्हारे जीवन में कोई कठिनाई आए तो मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा।” यही रक्षाबंधन है। भारतीय संस्कृति की सुंदरता ...
मक्का रक्षा समझौता और भारतीय उपमहाद्वीप का बदलता भू-राजनीतिक चक्रव्यूह

मक्का रक्षा समझौता और भारतीय उपमहाद्वीप का बदलता भू-राजनीतिक चक्रव्यूह

लेख, विशेष समाचार
डॉ. मयंक चतुर्वेदी मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच सात अगस्त 2026 को हुआ ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ भारतीय उपमहाद्वीप में ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य-पूर्व में जारी संघर्षों ने पारंपरिक सुरक्षा समीकरणों को हिला दिया है। समझौते के तहत तीनों देशों ने सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करने और किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला मानने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत के लिए इस घटनाक्रम की गंभीरता तब और बढ़ जाती है, जब इसी समझौते के प्रति बांग्लादेश ने भी सकारात्मक रुख के संकेत दिए हैं। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि ढाका सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। ऐसे में मक्का समझौते को इस्लामिक मजहबी करण के उम्मा के तहत एकजुटता के चश्मे से भी देखा ...
अनुच्छेद 370 से 5 अगस्त 2019 तक: जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक यात्रा, राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत प्रतिबिंब

अनुच्छेद 370 से 5 अगस्त 2019 तक: जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक यात्रा, राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत प्रतिबिंब

लेख
कैलाश चन्द्र स्वतंत्रता के साथ ही भारत के अनेक जटिल प्रश्न राष्ट्र के समक्ष उपस्थित हुए। इनमें सबसे संवेदनशील और दीर्घकालिक प्रश्न जम्मू-कश्मीर का था। यह केवल किसी राज्य के भारत में विलय का विषय नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संघीय व्यवस्था, लोकतांत्रिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और संवैधानिक विकास की ऐसी गाथा थी, जिसने स्वतंत्र भारत की राजनीति और संविधान को सात दशकों तक प्रभावित किया। 5–6 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करने तथा अनुच्छेद 35A के अप्रभावी होने के साथ इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हुआ और एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ। इस विषय को समझने के लिए केवल 2019 को देखना ही पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे 1947 से प्रारम्भ हुई घटनाओं, संविधान सभा की बहसों, राष्ट्रपति के आदेशों, संसद की भूमिका, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और जम्मू-कश्मी...