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पं. विद्यानिवास मिश्रः भारतीय चिंतन धारा के अप्रतिम व्याख्याकार

पं. विद्यानिवास मिश्रः भारतीय चिंतन धारा के अप्रतिम व्याख्याकार

लेख
शहर, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। पं. विद्यानिवास मिश्र, भारतीय चिंतन के अप्रतिम व्याख्याकार, ने अपने विचारों और साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी। उनके कार्य ने भारतीय विचारधारा को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यानिवास मिश्र का जीवन और चिंतन पाश्चात्य प्रभाव के बावजूद भारतीय परंपरा की समृद्धि को उजागर करता है। उनके लेखन में धर्म, लोक, शास्त्र और आधुनिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों की गहराई से व्याख्या की गई है। मिश्र जी का मानना था कि मानव विकास का असली उद्देश्य मनुष्य को अधिक मानव बनाना है, और उन्होंने इसे अपने कार्यों में प्रतिबिंबित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति की महत्ता को समझाते हुए यह बताया कि मनुष्य और प्रकृति के बीच एक सहकारी संबंध होना चाहिए, न कि एक प्रतिस्पर्धात्मक। उनकी सोच आज के वैश्विक संदर्भ में भी प्रासंगिक है, जहां मानवता को एकजुट होने औ...
वैश्विक मंच पर हिंदी

वैश्विक मंच पर हिंदी

लेख
शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star News भारत की सांस्कृतिक चेतना की समृद्ध विरासत हिंदी न केवल हमारी अस्मिता की पहचान है वरन हमारे राष्ट्र की आत्मा भी है। अब हिंदी केवल परस्पर संवाद और संपर्क का माध्यम ही नहीं है वरन वैश्विक स्तर पर भी अपनी सर्जनात्मकता, जिजीविषा और समावेशिता के कारण अपने प्रभुत्व का निरंतर विस्तार कर रही है। विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) पर विशेष इसलिए विश्व में हिंदी प्रयोक्ताओं की संख्या लगभग 100 करोड़ से अधिक हो गई है। पहले अंग्रेजों के साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होने का मिथक था जो इतिहास बन गया किंतु अब हिंदी के लिए गर्व का विषय है कि उसके बोलने, समझने और लिखने वालों का संसार इतना विराट हो गया कि वहाँ कभी सूर्य अस्त नहीं होता। भारतीय प्रतीकों और राष्ट्रवाद की प्रखरता को मुखरता के साथ प्रस्फुटित करने वाली हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थाप...