ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh) की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (Former Prime Minister Khaleda Zia) के अंतिम संस्कार में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S Jaishankar) पहुंचे थे। अब बांग्लादेश का कहना है कि उनकी इस यात्रा को राजनीतिक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते कैसे होंगे, यह भविष्य बताएगा। खास बात है कि साल 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बना हुआ है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा, ‘उनकी यात्रा छोटी थी, लेकिन वह पूरे कार्यक्रम में रहे और फिर रवाना हो गए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह एक अच्छा कदम था। हमें इसमें और ज्यादा कुछ खोजने की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, क्योंकि उनकी यात्रा छोटी थी और पूरी तरह से औपचारिक थी।
क्या संबंध सुधरेंगे
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, जब विदेश सलाहकार से पूछा गया कि क्या जयशंकर की इस यात्रा से दोनों मुल्कों में तनाव कम होगा। इस पर उन्होंने जवाब दिया, ‘आपको इसका जवाब भविष्य में खोजना होगा।’
तारिक रहमान को सौंपा पीएम मोदी का पत्र
जयशंकर ने BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक शोक संदेश पत्र सौंपा। रहमान जिया के बड़े बेटे हैं। 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों में प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाने वाले रहमान से मुलाकात के दौरान, जयशंकर ने विश्वास व्यक्त किया कि जिया का ‘दृष्टिकोण और मूल्य’ दोनों देशों के बीच साझेदारी के विकास का मार्गदर्शन करेंगे। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा, ‘मैंने उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र सौंपा। मैंने भारत सरकार और जनता की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की।’
पाकिस्तानी स्पीकर से मिलाया हाथ
पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि नेशनल असेंबली के अध्यक्ष सरदार अयाज सादिक और भारत के विदेश मंत्री के बीच बांग्लादेश की राजधानी ढाका में छोटी मुलाकात हुई। खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार दोनों पक्षों में किसी तरह की मुलाकात है। दोनों नेता जिया के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। नेशनल असेंबली सचिवालय ने एक बयान में कहा कि जब सादिक जिया के निधन से संबंधित शोक पुस्तिका में संदेश लिखने संसद भवन पहुंचे तो विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों की मौजदूगी में जयशंकर ने उनसे मुलाकात की और हाथ मिलाया।
