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ये कैसे इस्लाम के खिलाफ है; वंदे मातरम की मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कर दी वकालत


जबलपुर। वंदे मातरम को गैर इस्लामिक बताने की बहस के बीच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का बयान सामने आया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े इस संगठन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाना इस्लाम के खिलाफ नहीं है, और इसका विरोध करने वाले लोग मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत के वर्ष भर चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि वंदे मातरम् का मतलब है ‘हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं’। यह इस्लाम-विरोधी या शरीयत के खिलाफ कैसे हो सकता है, जबकि यह देश की उपजाऊ भूमि, पेड़ों, फूलों, पानी, पहाड़ों और सुंदर सुबह-शाम की प्रशंसा करता है? मुद्दीन पूर्व सांसद ओबीसी और अल्पसंख्यक वित्त निगम के उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने आगे कहा, “यह गीत राष्ट्र के प्रति प्रेम व्यक्त करता है, जिसे इस्लाम में ‘हुब्ब-उल-वतन’ (Hubb-ul-Watani) और हिंदी में ‘राष्ट्रवाद’ के रूप में जाना जाता है। कुछ कट्टरपंथी इसे पूजा से जोड़कर मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।”

मुद्दीन ने आगे कहा, “मुसलमानों को वंदे मातरम् कहने पर गर्व महसूस करना चाहिए और इसे गर्व के साथ पढ़ना चाहिए।” मुद्दीन ने दावा किया कि आज़ादी से पहले, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और अन्य प्रमुख मुस्लिम नेता गर्व के साथ वंदे मातरम् का पाठ करते थे। लेकिन आजादी के बाद, कुछ अलगाववादी तत्वों ने समुदाय को गुमराह करने और उसे राष्ट्रीय मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश की है। मुद्दीन ने यह भी बताया कि 2006 में जब वह मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने इस गीत का अनुवाद कराया था और उसे राज्य भर के सभी बोर्ड से रजिस्टर्ड मदरसों और मुसलमानों के बीच वितरित करवाया था।

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