मुंबई। बॉलीवुड के 90 के दशक में लीड हीरो के साथ साइड किरदार निभाने वाले करैक्टर आर्टिस्ट भी खूब मशहूर हुए। कुछ ऐसे एक्टर भी हुए जिनका नाम ऑडियंस को नहीं पता शायद लेकिन फिल्मों में उनके किरदारों को पसंद किया गया। एक ऐसा ही नाम है एक्टर इशरत अली का। आपको सनी देओल की फिल्म गदर का वो सीन तो याद ही होगा जब दारा सिंह से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाए जा रहे थे। इसी सीन में जो काजी के किरदार में थे वहीं हैं इशरत अली।
स्पॉट बॉय से लेकर बड़े थिएटर तक
मुंबई में जन्मे इशरत इंडस्ट्री में किसी को नहीं जानते थे, इसलिए शुरुआत एक स्पॉट बॉय के रूप में की। कैमरा यूनिट में असिस्टेंट्स का सामान उठाते-रखते इन्होंने फिल्म सेट की दुनिया को करीब से देखा और सीखा। फिर मौका मिला 1988 की फिल्म काल चक्र में काम करने का। इस फिल्म में उन्हें यशवंत कात्रे नाम के भ्रष्ट पॉलिटिशियन का किरदार मिला था। इशरत अपने नेगेटिव किरदार इतनी शिद्दत से निभाते थे कि इन्हें अपने इन्ही विलेन वाले रोल ने पहचान दिला दी।
गदर में निभाया काजी का किरदार
फिल्म क्रांतिवीर में पॉलिटिशियन चंदर सिंह के रूप में, आंदोलन में आज़ाद देशपांडे बनकर और आ गले लग जा में साइको किलर रकाब सिंह के किरदार में इन्होंने ऑडियंस को हैरान किया। इशरत अली ने सिर्फ विलेन ही नहीं, बल्कि कई यादगार किरदार निभाए जैसे तुम मेरे हो में आमिर खान के पिता और आतंक ही आतंक में आमिर और रजनीकांत दोनों के पिता का किरदार। वहीं गदर: एक प्रेम कथा में उनके निभाए गए काजी का किरदार यादगार बना दिया था। इशरत ने करीब 150 फिल्मों में काम किया।
फिल्मी दुनिया से बना ली दूरी
इशरत अली अब एक्टिंग की दुनिया से खुद को पूरी तरह से दूर कर चुके हैं। बताया जाता है कि उन्होंने 2014 के बाद किसी फिल्म में काम नहीं किया। उनका आखिरी टेलीविजन शो चिड़ियाघर था, जिसमें उनके काम की काफी तारीफ हुई थी। आज इशरत अली पूरी तरह अध्यात्म की ओर मुड़ चुके हैं। अब वे पांचों वक्त की नमाज़ पढ़ते हैं, खुदा का शुक्र अदा करते हैं और सादगी भरी ज़िंदगी जी रहे हैं। अपनी पत्नी निगार सुल्तान और बच्चों के साथ मुंबई में रहते हुए अब शोहरत की चमक से कोसों दूर हैं।
