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चांदी के भाव में जोरदार उछाल के बीच सप्लाई संकट गहराया, सिल्वर ईटीएफ में निवेश पर रोक

नई दिल्ली। देश में चांदी की कीमतों (Silver Price) में जोरदार उछाल के बीच इसकी सप्लाई पर संकट गहराने लगा है। सप्लाई की कमी के चलते इसके दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसे देखते हुए कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियों (Mutual fund Companies) ने चांदी आधारित सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs) में एकमुश्त (लंप-सम) और स्विच-इन निवेशों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। दीवाली के बाद सप्लाई सामान्य होने पर निवेश फिर शुरू दिया जाएगा।


इन कंपनियों का कहना है कि फैसला मार्केट की मौजूदा परिस्थितियों और घरेलू बाजार में फिजिकल सिल्वर की कमी के कारण लिया गया है। अभी घरेलू चांदी की कीमतें वैश्विक कीमतों से ज्यादा प्रीमियम पर चल रही हैं, जिसका सीधा असर सिल्वर ईटीएफ की यूनिट (एनएवी) और रिटर्न पर पड़ सकता है। इसका मतलब है कि अभी नए निवेशक अगर रकम लगाते हैं तो उन्हें नुकसान का खतरा हो सकता है।


15 फीसदी तक उछला प्रीमियम
त्योहारों की खरीदारी और औद्योगिक मांग बढ़ने से चांदी की खपत में तेज इजाफा हुआ है लेकिन बाजार में उपलब्धता कम है। इसके अलावा, आयात भी कम हो रहा है, जिससे कीमतें और बढ़ रही हैं। देश में चांदी की कीमतें वैश्विक कीमतों से 10-18 फीसदी ज्यादा हैं। इसका असर चांदी के ईटीएफ पर भी दिख रहा है। ईटीएफ का प्रीमियम वास्तविक बाजार भाव (स्पॉट प्राइस) से 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि निवेशक सिल्वर की वास्तविक कीमत से ज्यादा पैसे दे रहे हैं।


निवेशकों में खरीदारी की होड़
मुंबई के मशहूर झावेरी बाजार के एक जाने-माने बुलियन डीलर ने भी पुष्टि की कि निवेश की बढ़ती मांग के बाद चांदी के सिक्कों और छड़ों की भारी कमी हो गई है। उन्होंने बताया कि डीलर अब स्विट्ज़रलैंड और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से हवाई मार्ग से आयात करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि सामान्यतः समुद्री मार्ग से आने में ज्यादा समय लगता है।


उन्होंने कहा, “आयात ऑर्डर में देरी की वजह यह है कि हाल ही में कई निवेशक, जिन्होंने इस रैली के शुरुआती दौर को मिस कर दिया था, अब ‘फोमो’ (छूट जाने के डर) मे बाजार में निवेश कर रहे हैं।


स्पॉट कीमत और प्रीमियम में अंतर
स्पॉट प्राइस : यह सोने या चांदी की वास्तविक बाजार कीमत होती है, जिस पर खरीदारी वाले दिन के भाव पर ही तुरंत सौदा होता है। यानी कोई ग्राहक आज ही चांदी खरीदकर अपने घर लाना चाहते हैं, तो जो भाव चल रहा होगा, वही चुकाना होगा।


प्रीमियम : अगर किसी दिन बाजार में मांग बहुत ज्यादा है,लेकिन विक्रेता कम हैं, तो खरीदार चांदी जल्दी पाने के लिए अधिक कीमत देने को तैयार हो जाते हैं। वास्तविक मूल्य के ऊपर चुकाई गई यह अतिरिक्त रकम ही प्रीमियम कहलाती है। बाजार की स्थिति के कारण प्रीमियम घटता या बढ़ता रहता है।


ऐसे समझें असर को
सिल्वर ईटीएफ का कारोबार सुबह 9:15 बजे शुरू होता है, जबकि सराफा बाजार (भौतिक धातु बाजार) आमतौर पर 10 बजे से सक्रिय होता है। इस बीच अगर ईटीएफ में अचानक खरीद बढ़ जाती है तो फंड मैनेजर के सामने आपूर्ति का संकट बढ़ जाता है। साथ ही महंगे दाम पर चांदी खरीदनी पड़ती है। इससे बचने के लिए वे प्रीमियम बढ़ा देते हैं।


आगे क्या होगा
फंड मैनेजरों का कहना है कि ऊंचा प्रीमियम निकट भविष्य में बना रह सकता है, क्योंकि जिन घरेलू बुलियन डीलरों से वे धातु खरीदते हैं, उनके पास चांदी का बहुत कम स्टॉक उपलब्ध है। गौरतलब है कि मल्टी-एसेट म्यूचुअल फंड योजनाओं के कुल एसेट्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सोने और चांदी में निवेशित रहता है।


कितने पहुंचे दाम
वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में यह 51.22 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। लेकिन भारत में कीमतें और ज्यादा हैं क्योंकि यहां चांदी की कमी है और निवेशकों की मांग बहुत है।


राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार कर चांदी की कीमत 8,500 रुपये उछलकर 1,71,500 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। गौरतलब है कि भरत में हर साल सात हजार टन चांदी की खपत होती लेकिन उत्पादन सिर्फ 700 टन है। बाकी हिस्सा आयात करना पड़ता है।


क्या करें निवेशक
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घरेलू बाजार में चांदी की स्पॉट कीमत आयात दाम से काफी ज्यादा है, जब यह सामान्य स्तर पर आ जाएगा, तब दोबारा निवेश की अनुमति दी जाएगी। विशेषज्ञ लंबी अवधि के लिए अब भी चांदी को बेहतर निवेश मानते हैं, लेकिन अभी एकमुश्त निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।


उनका कहना है कि यह स्थिति कुछ हफ्तों से लेकर दो महीने तक रह सकती है। त्योहारों के बाद मांग कम हो सकती है और आयात बढ़ने से चांदी की आपूर्ति सामान्य हो सकती है। जब आपूर्ति बढ़ेगी, तो भारत में सिल्वर की कीमतें वैश्विक कीमतों के करीब आ सकती हैं।

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