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आरटीआई अधिनियम के 20 साल पूरे होने पर मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर लगाया इसे कमजोर करने का आरोप

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के 20 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून ने देश में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया दौर शुरू किया था, लेकिन पिछले 11 वर्षों में सरकार ने इसे व्यवस्थित रूप से कमजोर कर लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को कमजोर किया है।

खरगे ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि 20 साल पहले कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक कानून लागू किया था। यह कानून भ्रष्टाचार से लड़ने, सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनता के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था। लेकिन 2014 के बाद से लगातार इस अधिनियम के मूल उद्देश्य पर प्रहार किया गया है।

उन्होंने कहा कि 2019 में केंद्र सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन पर नियंत्रण स्थापित कर उनकी स्वतंत्रता खत्म कर दी। वहीं, 2023 में लागू डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून ने आरटीआई के सार्वजनिक हित वाले हिस्से को सीमित कर दिया, जिससे भ्रष्टाचार से जुड़ी जांचों में बाधा उत्पन्न हुई।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है और आठ पद 15 महीनों से रिक्त पड़े हैं, जिससे अपील प्रक्रिया ठप हो गई है और हजारों नागरिक न्याय से वंचित हैं।

खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने कोविड महामारी, राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2017-18, कृषि सर्वेक्षण 2016-2020 और पीएम केयर फंड से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया, जिससे जवाबदेही से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि आरटीआई अधिनियम के मूल उद्देश्य को पुनर्जीवित किया जाए और नागरिकों के सूचना के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि लोकतंत्र की आत्मा — पारदर्शिता और जवाबदेही — जीवित रह सके।

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