भिंड। महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को कानून की गिरफ्त से बचाने के लिए फर्जी दस्तावेज (Forged documents) तैयार कर उसे नाबालिग घोषित करने का सनसनीखेज मामला हाल ही में भिंड (Bhind) में सामने आया था, जिसके बाद जिला न्यायालय ने इस मामले में प्रथम दृष्टया साजिश और कूटरचना के आरोपों को गंभीर मानते हुए 4 प्रशासनिक अधिकारियों सहित 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश सिटी कोतवाली थाना पुलिस को दे दिए हैं।
कोर्ट के आदेश के दायरे में तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, तत्कालीन पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, तत्कालीन सचिव शेर सिंह यादव, सरपंच राजकुमार दुबे, कल्लू यादव, आशुतोष सिंह यादव को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ ऐक्शन लेने की बात कही गई है। आरोप है कि सभी ने मिलकर भिंड जिले के ऊमरी थाना क्षेत्र के यादव के पुरा के रहने वाले आरोपी विमल यादव के पक्ष में फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। पूरा मामला वर्ष 2025 में महाराष्ट्र के ठाणे में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के केस से जुड़ा है।
रेप के आरोपी को नाबालिग साबित करने किया फर्जीवाड़ा
आरोप है कि घटना के समय विमल यादव बालिग था, लेकिन उसे नाबालिग साबित करने के लिए उसके पिता उमेश यादव ने कथित रूप से प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से फर्जी शपथ-पत्र और दस्तावेज तैयार कराए। आरोपों के मुताबिक आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 12 दिसंबर 2006 थी, जिसे बदलकर 25 दिसंबर 2007 कर दिया गया। इस तरह दस्तावेजों में एक वर्ष की हेराफेरी कर आरोपी को नाबालिग बताने की कोशिश की गई, ताकि उसे कानून का फायदा मिल सके।
फर्जीवाड़े के लिए बड़ी रकम का लेन-देन करने का आरोप
यह भी आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार की सहमति से पटवारी, ग्राम सचिव, सरपंच और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर षड्यंत्र पूर्वक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार किया। इस पूरे फर्जीवाड़े के बदले बड़ी रकम के लेन-देन के आरोप भी लगाए गए हैं।
कलेक्टर ने एसडीएम को सौंपा था जांच का जिम्मा
मामले में अधिवक्ता गौरव भारद्वाज ने जिला न्यायालय में परिवाद पेश किया था। सुनवाई के दौरान 18 मार्च 2026 को कोर्ट ने कलेक्टर को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी थी।
जांच रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट ने दिया FIR का आदेश
जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत होने के बाद न्यायालय ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सिटी कोतवाली पुलिस को संबंधित आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 336 (2), 336 (3), 340 (1), 340 (2) के तहत FIR दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिए। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।
