सियोल। उत्तर कोरिया (North Korea) के सैनिक रूस (Russia) के साथ मिलकर यूक्रेन युद्ध (Ukraine war) में लड़ रहे हैं। सही मायने में कहा जाए तो वे पुतिन के लिए जान हथेली पर रखकर जंग के मैदान में उतरे हैं। बताया जाता है कि वे दुश्मन के हाथों बंदी बनने की स्थिति में फंसते हैं तो खुद को बम कर उड़ा लेते हैं। उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन (North Korean dictator Kim Jong Un) ने खुद इस नीति की पुष्टि करते हुए ऐसे सैनिकों की प्रशंसा की है। सरकारी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि किम जोंग उन ने रविवार को सैनिकों को नायक बताते हुए कहा कि उन्होंने निडर होकर आत्मदाह और आत्मघाती हमले का रास्ता चुना। उन्होंने किसी मुआवजे की अपेक्षा नहीं की और वीरतापूर्ण मृत्यु को प्राप्त हुए।
शहीद सैनिकों के लिए स्मारक
बता दें कि प्योंगयांग में रूस के युद्ध में शहीद हुए उत्तर कोरियाई सैनिकों के सम्मान में एक स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और रूसी रक्षा मंत्री एंड्री बेलोसोव ने संयुक्त रूप से इस संग्रहालय का अनावरण किया। समारोह के दौरान सैन्य जेट विमान आसमान में उड़ान भरते रहे और सफेद गुब्बारे छोड़े गए। रूस की ओर से स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन भी मौजूद रहे।
इस दौरान किम ने शहीद सैनिकों को पुष्प अर्पित किए और अतिथि पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। किम ने अपने भाषण में कहा कि ये शहीद सैनिक ‘कोरियाई लोगों की वीरता के प्रतीक’ बनकर रहेंगे और कोरियाई तथा रूसी लोगों के ‘विजयी मार्च’ को मजबूती देंगे।
उत्तर कोरिया-रूस सैन्य समझौता
बता दें कि उत्तर कोरिया और रूस के बीच 2024 में एक व्यापक सैन्य समझौता हुआ था, जिसमें पारस्परिक रक्षा का प्रावधान शामिल है। 2025 में दोनों देशों ने घोषणा की कि उनके सैनिकों ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन की घुसपैठ को रोकने के लिए संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी।
दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने इस युद्ध में करीब 15000 सैनिक रूस को भेजे थे, जिनमें से लगभग 2000 मारे जा चुके हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दक्षिण कोरिया ने दावा कि है कि उत्तर कोरिया ने रूस को हथियारों की बड़ी खेप भी भेजी है।
