
नई दिल्ली, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की पुनर्बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय से गांधी स्मृति तक एक विरोध मार्च निकाला। पार्टी नेताओं ने घोषणा की कि जब तक सरकार मनरेगा को पुनर्जीवित नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस के “मनरेगा बचाओ संग्राम” आंदोलन के तहत आयोजित इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने उस मनरेगा को समाप्त कर दिया है जो पंचायतों को सशक्त बनाने और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए लोगों तक सीधे पैसे पहुंचाने का माध्यम था।
उन्होंने कहा कि मनरेगा एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी अधिनियम था, जिसे सितंबर 2005 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसे बनाने में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का महत्वपूर्ण योगदान था। मनरेगा कानून एक संवैधानिक अधिकार था, जो लोगों को रोजगार की कानूनी गारंटी देता था। इस कानून के माध्यम से पंचायतें मजबूत हुईं और हर परिवार को पहली बार डीबीटी के जरिए पैसे मिले, लेकिन इसे खत्म कर दिया गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं चाहते कि महात्मा गांधी से जुड़ा यह कानून लंबे समय तक चले।
दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि देश के करोड़ों गरीबों की रोजगार और सम्मान की गारंटी है। कांग्रेस शासन में गरीबों को अपने गांव में रहकर इज्जत की रोटी कमाने का हक मिला था, जिससे ग्रामीण भारत का विकास हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस व्यवस्था को कमजोर किया है। यह संघर्ष हर किसान और मजदूर के लिए है, जिसका हक छीना जा रहा है।
कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जो सरकार देश के अन्नदाता और श्रमशक्ति का अपमान करती है, वह सत्ता में अधिक समय तक नहीं रह सकती। कांग्रेस ने घोषणा की है कि जब तक सरकार मनरेगा को पुनः बहाल नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत- रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी कानून लागू किया है, जिसमें सालभर में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है, जबकि मनरेगा में केवल 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी।
