
क Kathmandu, 30 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के उपाध्यक्ष डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने देश की धार्मिक पहचान को लेकर अपने पुराने बयान के चलते उठे विवाद के बीच यू टर्न लेते हुए कहा है कि उनकी पार्टी हिन्दू, बौद्ध तथा किरात समाज वाली सनातन सभ्यता का कवच है।
डॉ. वाग्ले ने शुक्रवार सुबह फेसबुक पर अपने खिलाफ लगे आरोपों का खंडन करते हुए यह स्पष्ट किया। दरअसल पिछले चुनाव में डॉ. वाग्ले ने एक भाषण में कहा था कि जो भी नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता है, उसे इस पार्टी को छोड़ देना चाहिए। हालांकि, उनका यह बयान फिर से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे उनकी पार्टी के उम्मीदवारों से मतदाता सवाल पूछने लगे हैं। वाग्ले के इस बयान का जबरदस्त विरोध होने के कारण उन्होंने आज सफाई दी है।
उन्होंने लिखा, “सनातन सभ्यता और उन्नत लोकतंत्र—जब हमारी यह धारणा इतनी स्पष्ट है, तो विपक्ष भ्रम फैलाने के लिए क्यों सक्रिय है?” आगे वाग्ले ने कहा, “हम सनातन सभ्यता के रक्षक हैं और उदार, सहिष्णु व बहुलवादी समाज का कवच हैं।”
वाग्ले ने पार्टी के सार्वजनिक दस्तावेजों को पढ़ने का सुझाव दिया और कहा, “कृपया हमारे दस्तावेज पढ़िए। उन्हीं दस्तावेजों में बार-बार सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। हमने स्पष्ट रूप से लिखा है कि हमें नेपाल के इतिहास और नेपाल की सनातन सभ्यता पर गर्व है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नेपाल का सनातन सभ्यता वाले हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म और यहां के आदिवासी जनजाति समाज का किरात धर्म ही इस देश का आधार स्तंभ है। वाग्ले ने इसे नेपाल की पहचान बताते हुए कहा कि वे इन तीन धर्मों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और इनके खिलाफ होने वाले हर षडयंत्र के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
