वॉशिंग्टन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को नई धमकी दे दी है। इस बार उन्होंने कहा है कि अगर कनाडा अमेरिका के जॉर्जिया में गल्फस्ट्रीम एयरोस्पेस के जेट को सर्टिफिकेट नहीं देगा तो ट्रंप अमेरिका में बेचे जाने वाले किसी भी विमान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। ट्रंप की यह नई धमकी बीते दिनों उनकी कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई सार्वजनिक बहसबाजी के बाद आई है। दरअसल ट्रंप मार्क कार्नी के दावोस में दिए गए उस भाषण से खुन्नस खाए बैठे हैं जिसमें कार्नी ने अमेरिका की चौधराहट को खुले मंच से चुनौती दी थी। इसके बाद से ट्रंप कनाडा को रोज एक नई धमकी देते नजर आ रहे हैं।
ट्रंप ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में पोस्ट में कहा कि वह सवाना, जॉर्जिया स्थित गल्फस्ट्रीम एयरोस्पेस के जेट को सर्टिफिकेट देने करने से इनकार करने की वजह से कनाडा के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा हूं और कनाडा ने तुरंत इन जेट्स को प्रमाणित नहीं किया तो 50 फीसदी टैरिफ लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कनाडा के सभी विमानों को गैर-प्रमाणित का दर्जा दे देगा। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा, “अगर, किसी भी कारण से, इस स्थिति को तुरंत ठीक नहीं किया जाता है तो मैं कनाडा पर अमेरिका में बेचे जाने वाले किसी भी और सभी विमानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाऊंगा।”
धमकी पर धमकी दे रहे ट्रंप
इससे पहले ट्रंप ने बीते दिनों कनाडा को कई धमकियां दी हैं। उन्होंने बीते सप्ताह यह कहकर हलचल मचा दी थी कि अगर कनाडा ने चीन के साथ व्यापार समझौता किया तो अमेरिका कार्नी के देश पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देगा। इसके बाद कार्नी ने कहा था कि उनके देश का ऐसा कोई इरादा नहीं है।
वहीं कनाडा में अमेरिकी राजदूत ने हाल ही में यह चेतावनी भी दी है कि अगर कनाडा 88 F 35 लड़ाकू विमान खरीदने के वादे से पीछे हटेगा तो नॉर्थ अमेरिका एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) की संरचना में बड़े बदलाव कर सकता है। बता दें कि NORAD अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य संगठन है।
एक भाषण से बौखलाए ट्रंप
ट्रंप के खुन्नस की असली वजह बीते दिनों वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिया गया कनाडाई पीएम मार्क कार्नी का भाषण है। कार्नी ने इस वैश्विक मंच पर ट्रंप का नाम लिए बिना, अमेरिकी रूल बेस्ड ऑर्डर को चुनौती दी थी। कार्नी ने बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि अब जमाना बदल गया है और अब छोटे देशों को साथ मिलकर इनका मुकाबला करना चाहिए।
