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यूक्रेन युद्ध में भर्ती के लिए रूस का नया ऑफर, रूसियों को युद्ध से क्यों दूर रख रहे पुतिन


मॉस्‍को। पिछले चार साल से चल रहा यूक्रेन युद्ध अब दोनों ही देशों के लिए थकाऊ साबित हो रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अब तक इस युद्ध में करीब 20 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में सैनिक संख्या को बराबर रखने के लिए दोनों ही देशों ने अलग-अलग तैयारी शुरू कर दी हैं। यू्क्रेन ने जहां पर आम नागरिकों की भर्ती पर निर्भर है, तो वहीं रूस ने भी एक हद तक उन्हें शामिल किया है, लेकिन ज्यादातर वह सैन्य अनुबंधों पर निर्भर है। इन भर्तियों को बढ़ाने के लिए रूस ने अब और भी नए ऑफर निकाले हैं।

बीबीसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक सीमा पर चल रहे युद्ध के लिए रूस ने जेल के कैदियों और दूसरे देशों से बेहतर जीवन की तलाश में आए प्रवासियों के लिए खास ऑफर दिया है। इन लोगों को यूक्रेन में युद्ध लड़ने का एक अनुबंध साइन करने के बदले में आजादी और प्रवासियों के लिए नागरिकता का रास्ता दिया है। गौरतलब है कि युद्ध से रुसियों को दूर रखने के लिए भी पुतिन ने उत्तर कोरिया के साथ रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत किम जोंग उन ने हजारों सैनिकों को लड़ने के लिए भेजा था।
रूसियों को युद्ध से क्यों दूर रख रहे पुतिन

रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया था उस वक्त पर सभी को लगा था कि यह युद्ध कुछ ही समय में खत्म हो जाएगा। लेकिन यूरोप और अमेरिका की मदद से यह युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है। एक तरफ यूक्रेन ने मार्शल लॉ लगाकर सैनिकों की भर्ती की लेकिन पुतिन ने ऐसा आदेश देने से परहेज किया। हालांकि 2022 में करीब 3 लाख लोगों की भर्ती की गई थी, बाद में इसे रोक दिया गया। इसके बाद क्रेमलिन ने सैनिकों की सेवानिवृ्त्ति पर रोक लगा दी। फिलहाल इस युद्ध में सैनिक संख्या को बनाए रखने के लिए रूस अब केवल स्वैच्छिक भर्ती पर ही निर्भर है।

दिसंबर में इस प्रक्रिया पर बयान देते हुए पुतिन ने कहा था कि 4 लाख से ज्यादा लोगों ने रूसी सेना के साथ सैन्य अनुबंध को साइन किया है। हालांकि उनके इस दावे की पुष्टि नहीं हो पाई थी।
हजारों डॉलर का बोनस और दबाव भी

रूसी सरकार सैन्य भर्ती को बढ़ाने के लिए ऐसे लोगों कई तरह की सुविधाएं भी दे रही है। इसके अलावा युद्ध क्षेत्र के प्रशासन और भर्ती करवाने वाले क्षेत्र भी सैनिकों को बोनस देते हैं, जो कई हजार डॉलर तक होते हैं। उदाहरण के रूप रूस के खांटी मांसी क्षेत्र से अगर कोई सेना में शामिल होता है तो उसे 50हजार डॉलर तक के बोनस मिलते हैं, जो कि यहां की वार्षिक आय से भी दोगुना होता है। इसके अलावा सैनिकों को टैक्स में छूट, कर्ज राहत और अन्य फायदे भी मिलते हैं।

हालांकि क्रेमलिन स्वैच्छिक भर्ती का दावा करता है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि 18 से 30 साल के अनिवार्य सैन्य सेवा वाले युवकों पर अक्सर दबाव डाला जाता है। इन्हें अनुबंध साइन करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे वे सीधे युद्ध में भेजे जाते हैं। इसके अलावा जेलों और विचाराधीन कैदियों की भी भर्ती की जाती है। इसकी शुरुआत युद्ध के शुरुआती दौर में भाड़े के सैनिकों के सरगना येवगेनी प्रिगोझिन ने की थी, जिसे बाद में रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपना लिया। अब कानून के तहत दोषियों और आपराधिक मामलों के संदिग्धों दोनों की भर्ती संभव है।
प्रवासियों को नागरिकता का लालच

दूसरे देशों से आए लोगों को भी युद्ध में शामिल करने का भी एक प्रयास जारी है। इसमें सबसे ज्यादा ऐसे लोगों को शामिल किया जाता है, जो रूस में एक बेहतर जीवन की तलाश में आए हैं। ऐसे लोगों को सैन्य अनुबंध साइन करने के बदले में तेजी के साथ रूसी नागरिकता दी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कि जिन इलाकों में प्रवासी रहते या काम करते हैं, वहां छापे मारकर उन्हें सैन्य सेवा के लिए मजबूर किया जाता है। नए नागरिकों को भर्ती दफ्तरों में भेजा जाता है, ताकि यह तय किया जा सके कि वे अनिवार्य सेवा के योग्य हैं या नहीं।

नवंबर में राष्ट्रपति पुतिन ने आदेश दिया कि नागरिकता चाहने वाले कुछ विदेशी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य होगी। इसके अलावा कई मामलों में लोगों को नौकरी का झांसा देकर रूस लाया जाता है और फिर धोखे से उनसे सैन्य अनुबंध साइन करवा लिया जाता है। 2023 में क्यूबा के अधिकारियों ने रूस से संचालित ऐसे एक मानव तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उसे तोड़ने की कोशिश की थी। नेपाल के विदेश मंत्री नारायण प्रकाश साउद ने 2024 में एपी से कहा था कि नेपाल ने रूस से सैकड़ों नेपाली नागरिकों को वापस भेजने और युद्ध में मारे गए लोगों के शव स्वदेश लाने की मांग की थी। इसके बाद नेपाल ने रूस या यूक्रेन में काम के लिए जाने पर रोक लगा दी। इसके अलावा भारत के भी कुछ लोग वहां पर युद्ध में फंसे हुए थे, जिन्हें सरकार के सहयोग से वापस लाया गया था। इसके अलावा भी कई और देश के नागरिक भी इसी तरह से यहां युद्ध लड़ रहे हैं।

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