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रुपये की गिरावट को इतना हल्‍के में मत लीजिए

रुपये की गिरावट को इतना हल्‍के में मत लीजिए

लेख
By: डॉ. मयंक चतुर्वेदी रुपये की गिरावट को इतना हल्‍के में मत लीजिए -डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को सरकार एक ऐतिहासिक आर्थिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। यह समझौता निःसंदेह भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करता है और दीर्घकाल में व्यापारिक संबंधों को मजबूती देने की क्षमता रखता है, किंतु इसी उत्सवधर्मी माहौल के बीच एक गंभीर आर्थिक संकेत डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का निरंतर कमजोर होने को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। देखा जाए तो वर्ष 2013 में जहां एक डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 68 के स्तर पर था, वहीं जनवरी 2026 तक यह 92 (91.95 रुपये प्रति डॉलर) के करीब पहुंच चुका है। लगभग 35 प्रतिशत का यह अवमूल्यन विदेशी मुद्रा बाजार का आंकड़ा आज भारत की एक हकीकत है, जो साफ तौर पर कहता है कि ये स्थिति हमारी अर्थव्यवस्...