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मैक्रॉ 48 घंटे में नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे

पेरिस, 09 अक्टूबर । फ्रांस में गहराते राजनीतिक संकट का हल निकालने के प्रयासाें के तहत राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने घोषणा की है कि वह अगले 48 घंटे में नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे।

उनका यह फैसला प्रधानमंत्री के ताैर पर सेबेस्टियन लेकोर्नू के अचानक इस्तीफे के बाद आया, जिन्होंने महज 26 दिनों में पद छोड़ दिया। यह आधुनिक फ्रांसीसी इतिहास में किसी प्रधानमंत्री का अबतक का सबसे छोटा कार्यकाल है।

मैक्रॉ ने बुधवार काे इस आशय की घाेषणा की कि वह दाे दिनाें के अंदर ही नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगे।

मैक्रॉ के करीबी और पूर्व रक्षा मंत्री लेकोर्नू ने सोमवार को एक मध्यमार्गी विचारधारा समर्थक मंत्रिमंडल का ऐलान किया था जिसकी सत्तारूढ़ और विराेधी सभी दलाें ने कड़ी आलोचना की। आलोचकों ने पूर्व वित्त मंत्री ब्रूनो ले मेयर जैसे चेहरों को बरकरार रखने पर तीखा हमला बोला, जिन्हाेंने कर्ज संकट के बीच कटौती नीतियों को जारी रखा था।

हालाकिं मैक्रॉ के अनुरोध पर लेकोर्नू ने 48 घंटे तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका निभाते हुए दक्षिण पंथी और वाम पंथी नेताओं से परामर्श कर “स्थिरता योजना” तलाशने की काेशिश की ताकि इस साल का बजट वर्ष के अंत तक पारित हो सके।

इस बीच यहां बयान में एलीसी पैलेस ने कहा, “सांसदों का बहुमत संसद भंग करने के खिलाफ है। स्थिरता का मंच मौजूद है और 31 दिसंबर तक बजट अपनाने का रास्ता संभव है।” मैक्रॉ ने लेकोर्नू को उनके प्रयासाें के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि उन्हाेंने साफ किया कि दक्षिण पंथी नेशनल रैली की मरीन ले पेन और वामपंथी फ्रांस अनबाेड की नए चुनावों की मांग संसदीय समर्थन से वंचित है।

फ्रांस में यह संकट दो वर्षों में पांचवा प्रधानमंत्री बदलने और 2022 के स्नैप चुनावों से मैक्रॉ के मध्यमवर्गीय नेताओं के बहुमत खोने से उपजा है। लेकोर्नू के पूर्ववर्ती मिशेल बार्नियर और फ्रांस्वा बायरू को अविश्वास प्रस्तावों से हटाया गया था।

इस बीच अगले प्रधानमंत्री के नाम पर अटकलें जाेराे पर हैं। इनमें एडोआर्ड फिलिप का नाम तेजी से उभरा है। हालांकि मैक्रॉ ने इस बारे में अभी तक चुप्पी साध रखी है।

मैक्रॉ के समक्ष 2023 के असैन्य पेंशन सुधार को निलंबित करना एक बड़ी चुनाैती है, जाे तीन अरब पांच कराेड़ डॉलर खर्च करा सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बोर्न अब इसका समर्थन करती हैं, लेकिन मैक्रॉ का रुख इस बारे में अभी साफ नहीं है। वैचारिक विभाजनों से जूझते फ्रांस में नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति नाजुक गठबंधन बना सकती है अथवा राजनीतिक गतिरोध काे और गहरा सकती है।

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