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डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहा देश… ATM की संख्या घटी, बचत खातों में जमा हुए 3.3 लाख करोड़

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में एटीएम (ATM) की संख्या में कमी आई है, क्योंकि लोग डिजिटल पेमेंट (Digital payments) की ओर बढ़ रहे हैं। ई-पेमेंट नेटवर्क ने ग्राहकों की नकद निकासी की जरूरत को कम कर दिया है, भले ही बैंक शाखाओं का विस्तार जारी रहा।


प्राइवेट बैंकों ने एटीएम सबसे ज्यादा घटाए
रिपोर्ट के मुताबिक, निजी बैंकों ने अपना एटीएम नेटवर्क 79,884 से घटाकर 77,117 कर दिया। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मुख्य रूप से ऑफसाइट मशीनें बंद करके अपने एटीएम 134,694 से 133,544 कर दिए।


व्हाइट लेबल एटीएम बढ़े
इसके विपरीत, व्हाइट लेबल एटीएम (नॉन-बैंकिंग संस्थाओं द्वारा स्थापित) ऑपरेटरों ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई और इनकी संख्या 34,602 से बढ़कर 36,216 हो गई।


शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ग्रामीण, अर्ध-शहरी, शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में अपने एटीएम संतुलित रूप से वितरित रखे। हालांकि, निजी और विदेशी बैंक अभी भी अपने एटीएम मुख्य रूप से शहरी और महानगरीय केंद्रों में केंद्रित रखते हैं।


बैंक शाखाओं का विस्तार जारी
इस दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के तेज विस्तार के चलते बैंक शाखाओं की संख्या 2.8 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,64,000 हो गई। सार्वजनिक बैंकों द्वारा खोली गई दो-तिहाई से अधिक नई शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में थीं, जबकि निजी बैंकों की केवल 37.5 प्रतिशत नई शाखाएं इन क्षेत्रों में खुलीं।


बचत खातों और जमा राशि में वृद्धि
बेसिक बचत बैंक जमाखातों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जो 2.6 प्रतिशत बढ़कर 72.4 करोड़ खाते हो गए। इन खातों में जमा राशि 9.5 प्रतिशत बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गई। अधिकांश खाते बिजनेस करिस्पॉन्डेंट के माध्यम से संचालित होते हैं, जो जमीनी स्तर पर बैंकिंग पहुंच बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है।


जमा बीमा कवरेज
जमा बीमा के संदर्भ में, रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 के अंत तक 97.6 प्रतिशत खाते मौजूदा 5 लाख रुपये के बीमा सीमा के दायरे में थे। हालांकि, बीमाकृत जमा राशि का अनुपात पिछले वर्ष के 43.1 प्रतिशत से थोड़ा घटकर 41.5 प्रतिशत हो गया।


डिजिटलीकरण है मुख्य कारण
आरबीआई ने एटीएम संख्या में कमी का कारण भुगतानों के बढ़ते डिजिटलीकरण को बताया है, जिसने ग्राहकों की एटीएम के माध्यम से लेनदेन की आवश्यकता को कम कर दिया है।

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