मुंबई। साउथ फिल्म इंडस्ट्री हमेशा से किसी ने किसी सुर्खियों में रहती है. हाल ही में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर शिवाजी इन दिनों भारी विवाद में घिर गए हैं. महिलाओं के छोटे कपड़ों को लेकर दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो के सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री और आम लोगों में नाराजगी देखने को मिली. कई लोगों ने इसे महिलाओं की आजादी पर हमला बताया.
इसी बीच फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने भी शिवाजी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अपने X हैंडल (ट्विटर) पर एक्टर की जमकर लताड़ लगाई. राम गोपाल वर्मा ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्हें उस इंसान का पूरा नाम तक नहीं पता. उन्होंने लिखा, ‘हे शिवाजी, तुम जो भी हो, अगर तुम्हारे घर की महिलाएं तुम्हारे जैसे बदतमीज और गंदे आदमी को सहन कर सकती हैं, तो तुम उन्हें एथिक्स का पाठ पढ़ा सकते हो’. उनका ये ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है.
राम गोपाल वर्मा ने लगाई एक्टक को लताड़
आरजीवी ने आगे लिखा, ‘समाज या फिल्म इंडस्ट्री की दूसरी महिलाओं पर राय देने का उन्हें कोई हक नहीं है’. इसी मुद्दे पर एक्टर मनोज मांचू ने भी शिवाजी के बयान की कड़ी आलोचना की. उन्होंने लिखा, ‘इस तरह के बयान बेहद निराशाजनक हैं. महिलाओं के कपड़ों पर सवाल उठाना या नैतिक जिम्मेदारी उन पर डालना पूरी तरह गलत और पुराने सोच का उदाहरण है’. मनोज ने कहा कि सम्मान और जिम्मेदारी की शुरुआत इंसान के अपने व्यवहार से होनी चाहिए, न कि महिलाओं को शर्मिंदा करके.
मनोज मांचू ने एक्टर शिवाजी की आलोचना की
मनोज मांचू ने आगे कहा कि इस तरह की कमेंट्स भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के खिलाफ हैं. उन्होंने लिखा, ‘समानता, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं हो सकता. महिलाओं के कपड़े सार्वजनिक बहस का विषय नहीं हैं’. उन्होंने दिग्गज कलाकारों की ओर से माफी मांगते हुए कहा कि ऐसे बयान सभी पुरुषों का प्रतिनिधित्व नहीं करते. दरअसल, ये विवाद तब शुरू हुआ जब शिवाजी अपनी आने वाली फिल्म ‘ढंडोरा’ के प्रमोशन के दौरान एक इवेंट में पहुंचे थे.
सभी हीरोइनों को साड़ी पहननी चाहिए – एक्टर शिवाजी
वहां उन्होंने एंकर श्रावंती चोक्कारापु की साड़ी की तारीफ करते हुए कहा कि सभी हीरोइनों को ऐसे ही कपड़े पहनने चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े या साड़ी पहननी चाहिए. उनके मुताबिक सुंदरता पूरी पोशाक में होती है. शिवाजी ने आगे कहा, ‘लोग बाहर से कुछ नहीं कहते, लेकिन मन में उन्हें ऐसे कपड़े पसंद नहीं आते’. उन्होंने यहां तक कहा कि महिलाएं प्रकृति की तरह होती हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने ग्लैमर की एक सीमा तय करने की बात कही.
