कराची। सिंधी संस्कृति दिवस के मौके पर कराची में अलग ‘सिंधुदेश’ की मांग को लेकर निकाला गया आजादी मार्च निकाला गया। जिये सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ और ‘सिंधुदेश आजादी’ के नारे लगाए। पुलिस द्वारा रूट बदलने पर भड़की भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए और कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पुराना बयान कि ‘एक दिन सिंध फिर भारत में वापस आएगा’ एक बार फिर सोशल मीडिया और पाकिस्तानी मीडिया में वायरल हो रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रविवार को अधिकारियों ने रैली का रूट बदल दिया, जिससे हजारों प्रदर्शनकारी गुस्से में आ गए और तनाव तेजी से बढ़ गया। हालात तब और बिगड़ गए जब भीड़ के कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए और तोड़फोड़ की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिंसा के मामले में कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डॉन अखबार के अनुसार, हिंसा में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस गाड़ियों में तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
सिंधुदेश की मांग को नई हवा
सिंध के इर्द-गिर्द चल रही नई राजनीतिक चर्चाओं के बीच सिंधुदेश की मांग को फिर से बल मिला है। पिछले हफ्ते एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल पर प्रसारित बहस में एक पत्रकार और एक विशेषज्ञ ने दावा किया कि मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट ( MQM) के नेता अल्ताफ हुसैन ने एक बार सिंध के पूर्व गृह मंत्री जल्फिकार मिर्जा से कहा था कि 18वें संशोधन के पास होने के बाद अब ‘सिंधुदेश कार्ड’ हमारे हाथ में है।
राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?
भारत में भी इस मुद्दे ने सुर्खियां बटोरीं जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सिंध क्षेत्र एक दिन फिर से भारत में वापस आ जाएगा। पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित सिंधी समाज सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी पीढ़ी के बहुत से सिंधी हिंदुओं ने 1947 के उस फैसले को कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जिसके कारण सिंध पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।
इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंध हमेशा से सांस्कृतिक रूप से भारत से जुड़ा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भले ही सिंध भारत का हिस्सा न हो, लेकिन सभ्यता के नजरिए से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। जहां तक जमीन का सवाल है, सीमाएं बदलती रहती हैं। कौन जानता है, कल को सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए।
