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पाकिस्तान पहाड़ों में छिपकर कर रहा परमाणु हथियारों का परीक्षण !


कराची। पाकिस्तान की काली करतूत अब ट्रंप को भी दिखने लगी है. उन्होंने शक जाहिर करते हुए कह दिया था कि शहबाज चुपके से न्यूक्लियर टेस्ट करवा रहे हैं. इस दावे के बाद पाकिस्तान की वो खुफिया जगह सामने आई है, जहां पर छुपकर ये काम किया जा रहा था. पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए अपने खूबसूरत पहाड़ भी नहीं छोड़े हैं. पता चला है कि पहाड़ों के बीच एक सुरंग बनाकर परमाणु हथियार तेजधार किए जा रहे हैं.

सिंधी नागरिक-समाज समूहों और सिंधूदेश आंदोलन के एक गठबंधन ने पाकिस्तान की सीक्रेट लोकेशन लीक कर दी है. इस गठबंधन के मुताबिक सिंध प्रांत के एकांत पहाड़ी इलाके में सीक्रेट तरीके से परमाणु-संबंधी गतिविधियां चल रही हैं और इसके साथ ही इस पर अंतर्राष्ट्रीय ताकतों को फौरन एक्शन लेने के लिए कहा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) को एक पत्र भेजा गया है. जिसमें, समूहों ने दावा किया कि जामशोरो के उत्तर में नूरीआबाद के पास, कंभर-शहदादकोट के आसपास, और मंचर झील के पश्चिम के क्षेत्रों में कई भूमिगत सुरंगें और चैंबर सिस्टम तैयार किए गए हैं. ‘जिये सिंध मुत्तहिदा महाज’ के अध्यक्ष शफी बुरफत ने इस खत की कॉपी अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर साझा भी किया है.
जिसके मुताबिक, इन सुरंगों के आसपास भारी मात्रा में सैन्य बल तैनात किए गए हैं. जहां प्रतिबंधित ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जा रहा है. इन सुरंगों का उपयोग परमाणु सामग्री के भंडारण और इसी से संबंधित प्रक्रियाओं को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है. समूहों ने चेतावनी दी कि अगर इन भूमिगत सुविधाओं में वास्तव में परमाणु सामग्री मौजूद है तो रेडियोएक्टिव संक्रमण, पर्यावरणीय क्षति और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु-सुरक्षा एवं अप्रसार मानकों के उल्लंघन का गंभीर खतरा हो सकता है.
पत्र में साफ कहा गया है कि उद्देश्य तनाव भड़काना नहीं है, बल्कि नागरिकों की रक्षा करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है. इसमें IAEA से जांच करने की अपील की गई और कहा गया है कि ऑन-साइट पड़ताल के लिए जल्द से जल्द तकनीकी विशेषज्ञ भेजे जाएं.
अंतर्राष्ट्रीय पड़ताल के लिए अपील
समूहों ने यह भी अनुरोध किया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एक विश्वसनीय तथ्यात्मक रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए, विशेष संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सहयोग से, एक स्वतंत्र, निष्पक्ष तथ्य-खोज अभियान लॉन्च करें, जल स्रोतों, कृषि, जैव विविधता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के लिए OHCHR, UNEP, और अन्य संयुक्त राष्ट्र निकायों द्वारा समानांतर मानवाधिकार और पर्यावरण आकलन भी करने का अनुरोध किया गया है.

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