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हिंदुत्व पर बहस में हिंदुओं को ही रखा बाहर, अमेरिकी यूनिवर्सिटी में चल क्या रहा है?


वाशिंगटन। अमेरिका के न्यू जर्सी के रटगर्स विश्वविद्यालय में ‘हिंदुत्व इन अमेरिका: समानता और धार्मिक बहुलवाद के लिए खतरा’ (Hindutva in America: A Threat to Equality and Religious Pluralism) नामक एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिक्योरिटी, रेस एंड राइट्स (CSRR) द्वारा संचालित था, जिसमें हिंदुत्व को अमेरिकी समाज में मुसलमानों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली विचारधारा के रूप में चित्रित किया गया। हालांकि, इस आयोजन को हिंदू समुदाय और अमेरिकी सांसदों सहित कई पक्षों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि इसमें किसी भी सक्रिय हिंदू प्रतिनिधि को भाग लेने का मौका नहीं दिया गया। आलोचकों का तर्क है कि यह चर्चा एकतरफा है और हिंदू छात्रों को असुरक्षित महसूस कराती है।

सांसदों का विरोध पत्र
बता दें कि कार्यक्रम से ठीक पहले, चार अमेरिकी सांसदों ( जिनमें दो भारतीय मूल के हैं) ने रटगर्स विश्वविद्यालय को एक पत्र लिखकर गहरी चिंता जताई थी। प्रतिनिधि स्टैनफोर्ड बिशप, सुहास सुब्रमण्यम, रिच मैककॉर्मिक और श्री थानेदार ने 24 अक्टूबर को यह द्विदलीय पत्र भेजा। उन्होंने इस आयोजन को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित और हिंदू छात्रों को अनुचित रूप से निशाना बनाने वाला’ करार दिया। पत्र में हिंदू छात्रों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई, जो खुद को परिसर में निशाना बनाए जाने का शिकार बताते हैं।
10000 अधिक ईमेल

विरोध में उतरते हुए एक वकालत समूह ने खुलासा किया कि छात्रों, अभिभावकों और समुदाय सदस्यों द्वारा रटगर्स प्रशासन को 10000 से अधिक ईमेल भेजे गए। इनमें विश्वविद्यालय से अपील की गई कि वह इस ‘हिंदू विरोधी’ कार्यक्रम से दूरी बनाए रखे। समूह ने कार्यक्रम की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें अमेरिका में हाल के हिंदू मंदिरों पर हमलों की अनदेखी की गई। दिसंबर 2023 से अब तक देशभर में सात हिंदू मंदिरों पर तोड़फोड़ हुई, और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में घृणा अपराध के आंकड़े बढ़े हैं, ये आंकड़े यहूदी-विरोधी घटनाओं के बाद दूसरे स्थान पर हैं।

वहीं, समूह ने पैनल में किए गए ‘झूठे दावों’ की भी निंदा की, जैसे हिंदूफोबिया को नकारना। इसके अलावा, पैनलिस्टों ने दावा किया कि नाजी हेकेनक्रूज़ हिंदू स्वस्तिक से मिलता-जुलता है, जबकि कोहना (CoHNA) के अनुसार, ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि हिटलर ने अपने प्रतीक को ‘हेकेनक्रूज’ ही कहा था, न कि स्वस्तिक।
हिंदू छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन

रटगर्स में हिंदू छात्रों ने कार्यक्रम स्थल के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय की छात्र समाचार वेबसाइट ‘द डेली टार्गम’ के अनुसार, संकाय सदस्य भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। एक हिंदू छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि एक व्यक्ति का हमें धोखा देने की कोशिश करना देखकर बहुत डर लगा। कोहना ने छात्र के हवाले से जोड़ा कि कई साथी रैली में आना चाहते थे, लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा सुरक्षा और निष्पक्षता संबंधी पत्रों की अनदेखी के कारण वे डरे हुए थे।

रटगर्स के हिंदू पुजारी हितेश त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि हम कार्यक्रम रद्द करने की मांग नहीं कर रहे थे। हम सिर्फ यही चाहते थे कि विश्वविद्यालय का ब्रांड हिंदू विरोधी बयानबाजी का समर्थन न करे, जो पहले ही छात्रों में भय पैदा कर चुका है और परिसर के माहौल को खराब कर दिया है।

‘द डेली टार्गम’ के अनुसार, चर्चा का संचालन रटगर्स लॉ स्कूल की प्रोफेसर और चांसलर की सामाजिक न्याय विद्वान सहर अजीज ने किया, जबकि मुख्य वक्ता रटगर्स विश्वविद्यालय-नेवार्क की इतिहास प्रोफेसर और एशियाई अध्ययन निदेशक ऑड्रे ट्रुश्के थीं।

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