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MP: ग्वालियर में कार्बाइड गन के इस्तेमाल और खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध

ग्वालियर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) (Carbide gun -Indigenous firecracker gun) से घायल होने के कई मामले सामने आए हैं। अंचल में तीन दिन में 19 युवा इस गन से निकलने वाली चिंगारी और बारूद से घायल हुए हैं। इसे देखते हुए ग्वालियर जिला प्रशासन (Gwalior District Administration) ने जिले में कार्बाइड गन और प्लास्टिक पाइप समेत अन्य खतरनाक उपकरणों के निर्माण और खरीद बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अब जिले में कार्बाइड गन और प्लास्टिक पाइप गन का इस्तेमाल प्रतिबंधित होगा।


ग्वालियर के मुरार स्थित जिला अस्पताल, जेएएच और रतन ज्योति नेत्रालय में आतिशबाजी से घायल होने के सबसे ज्यादा केस आए हैं। बुधवार को आठ ऐसे घायलों का ऑपरेशन किया गया है, लेकिन ऑपरेशन कितना सफल रहा और रोशनी कितनी हद तक लौट पाएगी यह अभी नहीं बताया जा सकता है।


भिंड के गोहद निवासी सतेन्द्र सिंह गुर्जर व सूरज गुर्जर जो ग्वालियर के डीडी नगर में किराए पर रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्बाइड गन (देशी पटाखा गन) का एड देखा था, जिस पर उन्होंने 200 रुपए में एक कार्बाइड गन ऑनलाइन खरीदी थी। मंगलवार की रात को जब वह कार्बाइड गन चला रहे थे तो गैस लाइटर का ट्रिगर दबाने के बाद भी धमाका नहीं हुआ।


इस पर सतेन्द्र ने कार्बाइड गन में जहां से पानी डालते हैं वहां से देखने का प्रयास किया तभी अचानक धमाका हो गया। सतेन्द्र और सूरज की आंख का कॉर्निया जल गया। गंभीर हालत में दोनों को जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में भर्ती कराया गया था।


सूरज की आंख का ऑपरेशन किया गया है, लेकिन सतेन्द्र की आंख का कॉर्निया बुरी तरह जल चुका है, जिस कारण जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भोपाल एम्स में संपर्क कर सतेन्द्र को भोपाल के लिए रेफर कर दिया है। जेएएच व जिला अस्पताल में चार केस आए हैं, लेकिन अकेले रतन ज्योति नेत्रालय में 15 के लगभग ऐसे केस आए हैं जिसमें आतिशबाजी व कार्बाइड गन से आंख में चोट लगी है। सभी का इलाज किया जा रहा है।


शिवपुरी जिले में अब तक 14 लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से 4 की आंखों की रोशनी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बताया जाता है कि कैल्शियम कार्बाइड में पानी डालने से एसिटिलीन (इथाइन) गैस बनती है, जो अत्यधिक ज्वलनशील होती है। यह गैस आंखों और फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है। डॉक्टरों का कहना है कि इस देशी कार्बाइड गन पर तत्काल सख्त प्रतिबंध लगाना चाहिए।


कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के साथ ही अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत दंडनीय होगा। आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने कार्बाइड गन के निर्माण, खरीद बिक्री और इस्तेमाल की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0751-7049101029, 0751-2363636 या 0751-2445333 पर देने की गुजारिश की है।

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