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माँ रतनगढ़ के दरवार में श्रृद्धालुओं ने देखे अदभुद चमत्कार


दतिया । मध्‍य प्रदेश के दतिया जिले के विध्यांचल पर्वत की घनी बादियों एवं ऊंचे पहाड़ पर स्थित रतनगढ़ माता मंदिर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दीपावली की दौज पर लगने वाले रतनगढ़ माता मेले में लाखों श्रद्धालू पहुंचे। गत वर्ष की तुलना में यहाँ और अधिक श्रद्धालु पहुंचे । यहां चप्पे-चप्‍पे पर मौजूद पुलिस एवं पर्किंग प्वाइंटो से जूझते वाहन चालक पहली बार यातायात को लेकर गंभीरता का प्रमाण बने। जिला प्रशासन द्वारा एक माह की मशक्त के बाद की गई। चौकस व्यवस्थाओं के बीच लाखों श्रृद्धालुओं ने माता रतनगढ़ और कुंअर बाबा के श्रद्धापूर्वक दर्शन किए।

सबने देखे अद्भुत चमत्कार
विज्ञान की हदें समाप्त करते कई चमत्कार लोगों ने देखे, लेकिन माँ रतनगढ़ृ के दरवार में अदभुद नजारा देखने को मिलता है। जहाँ महिलाएं पुरूष सर्पदंश से पीड़ित जैसे ही मंदिर के पास पहुंचे नदी किनारे पहुंचे है वैसे ही बेहोस हो जाते है और उनके परिजन कंधे पर रखकर या प्रशासन द्वारा कराई गई स्‍ट्रेचर व्यवस्था पर लिटाकर जैसे ही कुअर बाबा के दरवार में पहुंचते है वैसे ही पीड़ित होश में आ जाता है। वहीं सैकड़ों ऐसे लोग भी रहे जिनके पशुओं को भी बंध लगा था और वह पशुओं के बांधने वाले पस्से को लेकर मंदिर पहुंचे। जिससें नदी पर स्वतः गठान लगी और परिक्रमा के बाद वह खुद ही खुल गई।

लोग ले गये मंदिर की लकड़ी
ऐसी मान्यता है कि यहाँ की लकड़ घर पर रखने मात्र से सर्प सहित किसी भी जहरीली जीव का घर में प्रवेश नहीं रहता इसी मान्यता के चलते हजारों लोग मंदिर की लकड़ी घर ले गये।

स्ट्रेचरों की व्यवस्था रही सराहनीय
अब तक सर्पदंश पीड़ित व्यक्ति को जैसे ही मैहर आता था तो उसके परिजन कंधे के सहारे लेटाकर उसे मंदिर तक ले जाते थे। यहाँ माता एवं कुंआर बाबा के नाम झाड़ लगाते ही व्यक्ति स्वस्थ्य हो जाता है, परन्तु प्रशासन द्वारा स्ट्रेचर की व्यवस्था की थी। इसके तहत जैसे ही कोई महर का रोगी जमीन पर गिरता है। वैसे ही उसे स्ट्रेचर उपलब्ध कराकर उसके परिजनो के साथ माता के मंदिर तक पहुंचा देते है। इस व्यवस्था ने लोगों को राहत की सांस लेने का मौका दिया।

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