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फेफड़ों के कैंसर के उपचार और संदिग्ध कैंसर की पहचान पर सीएमई आयोजित

भोपाल। राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र (आरजीसीआईआरसी) ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), ग्रेटर भोपाल शाखा के सहयोग से 5 सितंबर को जहांनुमा पैलेस होटल में ऑन्कोलॉजी कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भोपाल के चिकित्सकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य पेशेवरों ने भाग लिया। कार्यक्रम में फेफड़ों के कैंसर के सर्जिकल उपचार, संदिग्ध कैंसर की पहचान, आवश्यक जांच और कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की।

सीएमई का उद्देश्य ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों और सामान्य चिकित्सा समुदाय के बीच ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान मजबूत करना तथा संभावित कैंसर के मामलों की समय पर पहचान, उचित जांच और विशेषज्ञों को शीघ्र रेफरल के संबंध में चिकित्सकों को अपडेट करना था। कार्यक्रम में आरजीसीआईआरसी के प्रमुख-थोरेसिक ऑन्कोसर्जरी डॉ. एल. एम. दारलोंग और सलाहकार-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. अभिनव देवान ने विशेषज्ञ सत्र लिए।

सही मरीजों में आज भी महत्वपूर्ण है सर्जरी

‘लंग कैंसर एंड इट्स सर्जिकल मैनेजमेंट इन करंट एरा’ विषय पर डॉ. एल. एम. दारलोंग ने फेफड़ों के कैंसर के सर्जिकल उपचार में हुए बदलावों और उपयुक्त मरीजों में सर्जरी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बेहतर जांच, सटीक स्टेजिंग, आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और बहु-विषयक उपचार योजना से मरीज के लिए बेहतर उपचार विकल्प तय करने में मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि सर्जरी का निर्णय लेने से पहले प्रत्येक मरीज का व्यक्तिगत मूल्यांकन आवश्यक है। इसमें कैंसर का प्रकार और चरण, ट्यूमर की स्थिति, मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। सत्र में यह भी बताया गया कि किन मरीजों को सर्जिकल मूल्यांकन से लाभ मिल सकता है और उपचार के दौरान विभिन्न कैंसर विशेषज्ञों के बीच समन्वय क्यों जरूरी है।

डॉ. दारलोंग ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर के उपचार में लगातार बदलाव हो रहे हैं और सही तरीके से चयनित मरीजों में सर्जरी की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है। सटीक स्टेजिंग, उपयुक्त मरीज का चयन और बहु-विषयक उपचार योजना बेहतर उपचार तय करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम उन चिकित्सकों के साथ सहयोग मजबूत करने में मदद करते हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों में अक्सर शुरुआती संपर्क बिंदु होते हैं।

संदिग्ध कैंसर में समय पर पहचान और रेफरल जरूरी

दूसरे सत्र में डॉ. अभिनव देवान ने ‘अप्रोच टू ए पेशेंट विद सस्पेक्टेड मैलिग्नेंसी एंड स्क्रीनिंग ऑफ कैंसर’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने संदिग्ध कैंसर वाले मरीज के प्रारंभिक मूल्यांकन और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के बारे में बताया। इसमें मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, चिंताजनक संकेतों एवं लक्षणों की पहचान, आवश्यक जांच और समय पर विशेषज्ञ के पास रेफर करने के पहलुओं पर चर्चा की गई।

उन्होंने कैंसर स्क्रीनिंग की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उम्र, जोखिम कारकों, पारिवारिक इतिहास और लक्षणों के आधार पर ऐसे लोगों की पहचान करने पर चर्चा हुई, जिन्हें आगे जांच की आवश्यकता हो सकती है। डॉ. देवान ने कहा कि कैंसर विशेषज्ञ केंद्रों से बाहर कार्य करने वाले चिकित्सक भी शुरुआती स्तर पर कैंसर की आशंका पहचानने और मरीज को उचित जांच एवं उपचार की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि कैंसर की शुरुआत कई बार सामान्य या अस्पष्ट दिखाई देने वाले लक्षणों से हो सकती है। व्यवस्थित चिकित्सकीय जांच, चेतावनी संकेतों की पहचान और समय पर रेफरल मरीज को शीघ्र सही निदान एवं उपचार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ कैंसर और उच्च जोखिम वाले लोगों में स्क्रीनिंग भी उपयोगी माध्यम है।

चिकित्सकों ने साझा किए अनुभव

सीएमई में भोपाल के चिकित्सा समुदाय ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों, रेफरल प्रक्रिया और बहु-विषयक कैंसर उपचार से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। संवादात्मक सत्र में चिकित्सकों को अपने अनुभव साझा करने तथा दैनिक चिकित्सा अभ्यास से जुड़े सवालों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का अवसर मिला।

आरजीसीआईआरसी ने आईएमए ग्रेटर भोपाल शाखा और स्थानीय चिकित्सा समुदाय के सहयोग एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। संस्थान की ओर से कहा गया कि इस तरह की शैक्षणिक पहल के माध्यम से निरंतर चिकित्सा शिक्षा, साक्ष्य आधारित कैंसर उपचार और विशेष कैंसर केंद्रों तथा क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने का प्रयास जारी रहेगा।

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