पटना। चारों तरफ फैला मटमैला पानी, डूबे हुए स्कूल और पानी में चलती नावें. बिहार में बाढ़ का यह मंजर इन दिनों नवगछिया (Naugachia) के मदरौनी इलाके (Madrauni area) में देखने को मिल रहा है. कोसी नदी (Kosi River) के बढ़ते जलस्तर के साथ गंगा (Ganga River) के उफान ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है. कहीं 5 से 6 फीट तक पानी भरा है, वहीं कई घरों के भीतर तक पानी पहुंच चुका है. ऐसे हालात में लोगों की आवाजाही का सहारा सिर्फ नाव रह गई है।
नाव के जरिए मदरौनी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया तो दूर-दूर तक पानी ही पानी नजर आया. स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले करीब 20 दिनों से कोसी का पानी लगातार फैल रहा है. इससे हजारों की आबादी प्रभावित है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार सबसे बड़ी परेशानी पानी की निकासी नहीं हो पाना है. कटिहार की तरफ जिस जगह कोसी नदी गंगा में मिलती है, वहां गंगा का जलस्तर पहले से बढ़ा हुआ है. ऐसे में कोसी का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है. यही पानी पीछे की तरफ फैलकर मदरौनी समेत आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंच रहा है।
घरों में घुसा पानी, नाव पर टिकी जिंदगी
बाढ़ बढ़ने के साथ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है. कई घरों में पानी घुस चुका है. जरूरी सामान लाने से लेकर एक जगह से दूसरी जगह जाने तक नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. गांव की सड़कें भी पानी में डूबी हुई हैं. लंबे समय से जलभराव के चलते लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बचाव कार्य तेज करने की मांग की है।
स्कूल और मंदिर भी डूबे
बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. मदरौनी इलाके के कई स्कूल पानी में डूब गए हैं. नासीटोला गांव का स्थानीय मंदिर भी बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा का जलस्तर कम नहीं हुआ तो कोसी के पानी की निकासी की समस्या बनी रहेगी. इससे मदरौनी समेत आसपास के गांवों में बाढ़ का संकट और गहरा सकता है।
ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर पर टिकी है. उनका कहना है कि जब तक गंगा का पानी नीचे नहीं आएगा, कोसी के पानी की निकासी आसान नहीं होगी. फिलहाल दर्जनों गांव पानी से घिरे हैं. बड़ी आबादी बाढ़ के बीच जिंदगी गुजार रही है।
