लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम के जरिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है। नितिन नवीन के नेतृत्व में घोषित राष्ट्रीय संगठन में यूपी से आठ नेताओं को जगह दी गई है। इनमें पिछड़ा, दलित, मुस्लिम और महिला प्रतिनिधित्व पर खास जोर दिखाई देता है।
भाजपा की इस रणनीति को विपक्ष के PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समीकरण की काट के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों के नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर चुनाव से पहले व्यापक संदेश देने की कोशिश की है।
यूपी के आठ चेहरों को संगठन में जगह
नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें दो-दो नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री की जिम्मेदारी मिली है, जबकि दो नेताओं को अलग-अलग मोर्चों की कमान सौंपी गई है।
पार्टी नेतृत्व ने जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की भी कोशिश की है। यूपी के इन आठ चेहरों में यादव, कुर्मी और मौर्य समुदाय से तीन ओबीसी नेता, एक ब्राह्मण, एक पारसी, एक दलित और दो मुस्लिम नेताओं को स्थान दिया गया है।
तीन महिलाओं को भी मिली अहम जिम्मेदारी
भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व पर भी विशेष जोर दिया है। राष्ट्रीय संगठन में शामिल 12 महिलाओं में तीन उत्तर प्रदेश से हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी देना पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें संगठन में अहम भूमिका देकर भाजपा ने उनके राजनीतिक कद और सक्रियता को बनाए रखने का संकेत दिया है।
धौरहरा की पूर्व सांसद रेखा वर्मा को भी तीसरी बार राष्ट्रीय संगठन में स्थान दिया गया है।
अमरपाल मौर्य को OBC मोर्चे की कमान
भाजपा ने राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष बनाकर पिछड़े वर्ग के बीच संगठन की पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है। मौर्य उत्तर प्रदेश भाजपा में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
यूपी की राजनीति में ओबीसी मतदाताओं की अहम भूमिका को देखते हुए इस नियुक्ति को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा की कोशिश है कि विपक्ष के PDA फॉर्मूले के तहत होने वाली सामाजिक लामबंदी का मुकाबला संगठन के स्तर पर ही किया जाए।
मुस्लिम चेहरों के जरिए भी बड़ा संदेश
नई टीम में यूपी से दो मुस्लिम नेताओं को जगह मिलना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है।
इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर सकती है कि पार्टी और उसकी सरकार की राजनीति को केवल मुस्लिम विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
2027 के लिए सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को अब बहुत लंबा वक्त नहीं है। ऐसे में भाजपा की राष्ट्रीय टीम में यूपी को मिली प्राथमिकता को सीधे 2027 के चुनावी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
विपक्ष जहां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा ने अपनी संगठनात्मक टीम में इन्हीं वर्गों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर जवाब देने की रणनीति अपनाई है।
महिला, ओबीसी, दलित और मुस्लिम चेहरों को अहम जिम्मेदारी देकर भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि 2027 की चुनावी लड़ाई सिर्फ सरकार के कामकाज पर नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और संगठन की ताकत पर भी लड़ी जाएगी।
