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PoK में चुनाव बहिष्कार का असर? कई बूथों पर नहीं पड़ा एक भी वोट, काले झंडों के साथ विरोध

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चुनावी प्रक्रिया के बीच कई मतदान केंद्रों पर बेहद कम मतदान की खबर सामने आई है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बीच कुछ पोलिंग बूथों पर कथित तौर पर एक भी वोट नहीं पड़ा। मतदान केंद्रों पर पोलिंग स्टाफ और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद मतदाताओं की संख्या बेहद कम रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, नौ मतदान केंद्रों में से कम से कम तीन पर शून्य मतदान दर्ज किए जाने की बात कही जा रही है। बाग-2, मलोट और बारा बारी जैसे केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदानकर्मी तैनात रहे, लेकिन मतदाता नजर नहीं आए। कुछ इलाकों में मतदान केंद्रों तक जाने वाली सड़कें भी सुनसान दिखाई दीं।

JAAC के बहिष्कार का असर?

कम मतदान की इन खबरों को JAAC के चुनाव बहिष्कार के आह्वान से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर पुंछ और बाग क्षेत्रों में चुनावी व्यवस्था और स्थानीय प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष की खबरें सामने आई हैं।

स्थानीय विरोध में शामिल लोगों ने चुनावी प्रक्रिया को कथित तौर पर ‘दिखावा’ बताया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दल स्थानीय समस्याओं और जनता की शिकायतों को दूर करने के बजाय सत्ता और राजनीतिक हितों पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

मतदान के बजाय लहराए काले झंडे

कुछ स्थानों पर लोगों के मतदान केंद्रों पर पहुंचने के बजाय काले झंडे लहराकर विरोध करने की खबर है। मतदाताओं की गैर-मौजूदगी के चलते कई जगह पोलिंग स्टाफ को लंबे समय तक खाली बैठना पड़ा।

हालांकि, कुछ बूथों पर शून्य मतदान की खबर को पूरे PoK में पूर्ण चुनाव बहिष्कार के तौर पर नहीं देखा जा सकता। दूसरे मतदान केंद्रों पर वोटिंग होने की भी जानकारी है और विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत अलग-अलग रहा।

आरक्षित सीटों को लेकर भी विरोध

JAAC के विरोध के पीछे PoK की चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल बताई जा रही है। संगठन पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा में आरक्षित सीटों का भी विरोध करता रहा है।

विरोध करने वालों का तर्क है कि इन आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। उनका कहना है कि विधानसभा में स्थानीय मतदाताओं की आवाज को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

भारतीय खुफिया सूत्रों ने क्या दावा किया?

दूसरी ओर, भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में इन घटनाओं को इस्लामाबाद के नियंत्रण के खिलाफ बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा गया है। सूत्रों का दावा है कि चुनावी ढांचे को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियों से भी दूरी का संकेत मिल रहा है।

हालांकि, शून्य मतदान वाले कुछ बूथों, विरोध प्रदर्शनों या बहिष्कार की घटनाओं के आधार पर पूरे PoK की जनता की राय का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक तस्वीर मतदान के अंतिम आंकड़ों और आधिकारिक चुनाव परिणामों से ही स्पष्ट होगी।

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