नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कभी सहमति नहीं दी थी और अब समारोह में जाने का सवाल ही नहीं उठता।
यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब NALSAR के छात्रों के एक समूह ने दीक्षांत समारोह में CJI की मौजूदगी का विरोध किया। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और स्नातक छात्रों के बहिष्कार की बात कही। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपना आदेश वापस लेते हुए खेद जताया।
‘मेरे शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता’
जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को संबोधित करने के कुछ घंटे बाद CJI सूर्यकांत ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि NALSAR की ओर से उन्हें मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण जरूर मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था।
CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।”
छात्रों ने क्यों किया विरोध?
NALSAR ने परंपरा के अनुसार CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। समारोह अगस्त के अंत या सितंबर में आयोजित होने की संभावना है।
हालांकि, विश्वविद्यालय के करीब 1,400 छात्रों में से 400 से अधिक छात्रों ने CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई। छात्रों ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च और उस दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणियों का हवाला दिया।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती, पैलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों की प्रोफाइलिंग के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
स्वत: संज्ञान नहीं लेने से नाराज थे छात्र
छात्रों की नाराजगी की एक प्रमुख वजह यह भी बताई गई कि CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेने से इनकार किया था।
22 जुलाई को एक वकील ने बिना औपचारिक याचिका दाखिल किए मामले से जुड़ी वीडियो फुटेज होने की बात कहते हुए कोर्ट के सामने इसे देखने का अनुरोध किया था। CJI ने उनसे आरोपों को स्पष्ट करते हुए उचित याचिका दाखिल करने को कहा था।
जब वकील बिना दस्तावेज पेश किए वीडियो देखने की मांग पर जोर देते रहे तो CJI ने उन्हें कोर्ट का समय बर्बाद नहीं करने और उचित प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी थी।
BCI के हस्तक्षेप से बढ़ा विवाद
CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने के विरोध के बाद विवाद और बढ़ गया। BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के कुलपति को पत्र भेजकर उन छात्रों की पहचान और जांच करने को कहा था, जिन्होंने CJI की मौजूदगी का विरोध किया था।
पत्र में कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी गई थी कि ऐसे छात्रों को भविष्य में अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण में परेशानी हो सकती है।
इस कदम की आलोचना के बाद BCI ने अपना सर्कुलर वापस ले लिया और खेद जताया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर जवाब मांगा है और टिप्पणी की कि नियामक संस्था को CJI और NALSAR छात्रों के बीच के इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
