नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अब पूर्वी एशिया में भी सुरक्षा तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। चीन और जापान के बीच रक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। चीन ने जापान के तेजी से विकसित हो रहे ड्रोन और मानव रहित सैन्य प्रणालियों पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि टोक्यो अपनी पारंपरिक “आत्मरक्षा” नीति की सीमाओं से आगे बढ़ रहा है।
PLA के मुखपत्र ने जताई चिंता
चीन की सेना के आधिकारिक समाचार पत्र PLA Daily ने हालिया संस्करण में जापान के मानव रहित सैन्य कार्यक्रमों पर कई विश्लेषण प्रकाशित किए हैं। इनमें दावा किया गया है कि जापान लंबी दूरी तक हमला करने, जवाबी कार्रवाई करने और अमेरिका के साथ संयुक्त अभियानों में सक्षम सैन्य क्षमताएं विकसित कर रहा है।
चीनी विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
जापान के रक्षा आधुनिकीकरण पर बढ़ी बहस
चीन की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब जापान अपनी रक्षा क्षमताओं में लगातार निवेश बढ़ा रहा है। टोक्यो ने हाल के वर्षों में रक्षा बजट बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और अमेरिका समेत सहयोगी देशों के साथ सैन्य सहयोग मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।
जापान का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आवश्यक है।
ड्रोन नेटवर्क पर बड़ा निवेश
रिपोर्टों के अनुसार, जापान ने 2023 से शुरू हुई पांच वर्षीय योजना के तहत मानव रहित सैन्य प्रणालियों पर लगभग एक ट्रिलियन येन (करीब 6.2 अरब अमेरिकी डॉलर) खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी ड्रोन कार्यक्रमों के लिए बड़ी राशि निर्धारित की गई है। इनमें तटीय सुरक्षा और निगरानी के लिए विकसित किए जा रहे “SHIELD” नेटवर्क को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
रणनीतिक द्वीपों पर तैनाती की योजना
जानकारी के अनुसार, जापान MQ-9B SeaGuardian ड्रोन, स्वायत्त समुद्री वाहन (AUV) और अन्य मानव रहित प्रणालियों को क्यूशू, ओकिनावा, इशिगाकी और योनागुनी जैसे रणनीतिक द्वीपों पर तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके अलावा मियाको और ओसुमी जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ाने की भी तैयारी की जा रही है।
चीन ने लगाए गंभीर आरोप
चीन का आरोप है कि जापान का सैन्य आधुनिकीकरण केवल रक्षात्मक नहीं है, बल्कि इससे उसकी आक्रामक क्षमता भी बढ़ रही है। चीनी विश्लेषकों ने जापान, अमेरिका और फिलीपींस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बताया है।
हालांकि, चीन की ये टिप्पणियां उसके आधिकारिक सैन्य विश्लेषणों और मीडिया में प्रकाशित विचारों पर आधारित हैं।
जापान का क्या कहना है?
जापान ने अपने रक्षा कार्यक्रमों को उचित ठहराते हुए कहा है कि क्षेत्र में बदलते सुरक्षा माहौल के कारण उसे अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करना पड़ रहा है।
टोक्यो का कहना है कि चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां, उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षण और रूस की सुरक्षा गतिविधियां उसकी नई रक्षा नीति के प्रमुख कारण हैं। इसी वजह से वह अपनी “काउंटरस्ट्राइक” क्षमता और आधुनिक रक्षा प्रणालियों का विस्तार कर रहा है।
क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी एशिया में चीन, जापान, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं है, लेकिन रक्षा तैयारियों और कड़े बयानों ने क्षेत्रीय तनाव को जरूर बढ़ा दिया है।
