
नई दिल्ली, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्यरत हन्ना जोसेफ हॉस्पिटल के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में निराशाजनक स्थिति के साथ अपनी शुरुआत की है, जिससे आईपीओ निवेशक निराश हैं। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 70 रुपये की कीमत पर जारी किए गए थे, जबकि आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 7.14 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 65 रुपये पर हुई। लिस्टिंग के तुरंत बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके कारण शेयर 61.75 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गए। इसके थोड़ी देर बाद खरीदारों ने लिवाली शुरू की, जिससे शेयर 68.25 रुपये के अपर सर्किट लेवल तक पहुंचे, लेकिन पहले दिन के कारोबार में निवेशक अभी भी 2.50 प्रतिशत के नुकसान में रहे।
हन्ना जोसेफ हॉस्पिटल का 42 करोड़ रुपये का आईपीओ 22 से 28 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इसका ओवरऑल 1.54 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) का रिजर्व पोर्शन 1.08 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) का 1.98 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स का 1.62 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 60 लाख नए शेयर जारी किए गए थे। आईपीओ से जुटाए गए धन का उपयोग कंपनी रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सेंटर स्थापित करने और अन्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर गौर करें तो सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के मुताबिक, कंपनी की वित्तीय सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 1.01 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो अगली वित्त वर्ष 2023-24 में 4.07 करोड़ रुपये और 2024-25 में 7.21 करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में, जो अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक है, कंपनी ने 5.12 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है।
इस दौरान कंपनी के राजस्व में भी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 54.90 करोड़ रुपये का कुल राजस्व मिला, जो 2023-24 में 63.63 करोड़ रुपये और 2024-25 में 77.90 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में, अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक, कंपनी ने 42.75 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है।
इस अवधि में, कंपनी के कर्ज में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में इसका कर्ज 42.95 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में 31.39 करोड़ रुपये और 2024-25 में 33.58 करोड़ रुपये तक घट गया। मौजूदा वित्त वर्ष तक कर्ज का बोझ 31.64 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में यह 18.20 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में 29.02 करोड़ रुपये और 2024-25 में 35.24 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 40.36 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह, ईबीआईटीडीए भी बढ़कर 16.38 करोड़ रुपये से 17.98 करोड़ रुपये और फिर 20.52 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। मौजूदा वित्त वर्ष में यह 11.65 करोड़ रुपये पर रहा है।
