अभाव से अवसर तक: नीति, नियोजन और विकास का भारतीय अनुभव
-कैलाश चन्द्र
इतिहास बीते समय की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, वह वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा तय करने का सबसे विश्वसनीय साधन होता है। जब हम भारत के आर्थिक इतिहास को देखते हैं, विशेषकर 1950 से 1991 तक के दौर को, जिसे आमतौर पर “लाइसेंस-परमिट राज” कहा जाता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह एक आर्थिक नीति से अधिक एक ऐसी व्यवस्था थी जिसने देश के आम नागरिक के जीवन, उद्योगों की गति और विकास की दिशा, तीनों को गहराई से प्रभावित किया।
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने गरीबी, संसाधनों की कमी, औद्योगिक पिछड़ापन और असमानता जैसी गंभीर चुनौतियाँ थीं। ऐसे समय में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में एक नियंत्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया, जिसका उद्देश्य सीमित संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना था। उस समय सोवियत संघ का नियोजित आर्थिक मॉडल प्रभावी माना जा रहा था, इसलिए भारत ने भी उत्पादन, वितरण औ...









